Maithili Writing Competition Saharsa: मातृभाषा में लिखने और अपनी बात कहने का मौका मिले तो बच्चों की रचनात्मकता किस तरह सामने आती है, इसकी झलक मंगलवार को बरियाही बाजार स्थित शांति मिशन एकेडमी में देखने को मिली. यहां मैथिली भाषा शोध परिषद की ओर से आयोजित मैथिली लेखन प्रतियोगिता के सफल छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया. मंच पर जब विद्यार्थियों ने अपनी लिखी रचनाओं का वाचन किया तो अतिथियों ने उनकी लेखन क्षमता और प्रस्तुति की जमकर सराहना की.
कार्यक्रम में मैथिली भाषा के विकास और संरक्षण के साथ बच्चों को अपनी मातृभाषा में लेखन के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया. वक्ताओं ने कहा कि नई शिक्षा नीति में क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और विकास को विशेष महत्व दिया गया है. ऐसे में स्कूल स्तर पर बच्चों को अपनी मातृभाषा से जोड़ना और उसमें रचनात्मक लेखन के लिए अवसर देना बेहद जरूरी है.
मैथिली में लिखने का मिला मंच, बच्चों ने दिखाई रचनात्मकता
शांति मिशन एकेडमी परिसर में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में प्रतियोगिता में सफल विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम विद्यालय के निदेशक ललित कुमार वर्मा और प्राचार्य समीर कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में हुआ.
प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले विद्यार्थियों ने मैथिली में अपनी रचनात्मक सोच को शब्दों में उतारा. सफल विद्यार्थियों को समारोह में अपनी रचनाएं मंच से पढ़ने का अवसर भी मिला. बच्चों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को खास बना दिया.
अतिथियों ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए उन्हें मातृभाषा में लगातार लिखने और पढ़ने के लिए प्रेरित किया.
नई शिक्षा नीति में क्षेत्रीय भाषाओं पर जोर
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि किसी क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा और पहचान से भी जुड़ी होती है. इसलिए क्षेत्रीय भाषाओं का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है.
वक्ताओं ने नई शिक्षा नीति के तहत क्षेत्रीय भाषाओं के विकास और संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला. मैथिली भाषा के प्रचार-प्रसार को लेकर सीबीएसई की प्रतिबद्धता और इसके महत्व पर भी चर्चा की गयी.
बच्चों को अपनी मातृभाषा में लेखन के लिए प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया. वक्ताओं के मुताबिक स्कूलों में इस तरह की प्रतियोगिताएं बच्चों को अपनी भाषा के करीब लाने के साथ उनके भीतर लेखन और अभिव्यक्ति का आत्मविश्वास भी बढ़ाती हैं.
वर्ग छह से आठ में तनु प्रिया प्रथम
शिक्षक शची कांत मिश्र के समन्वय में आयोजित प्रतियोगिता को दो समूहों में बांटा गया था. वर्ग छह से आठ के समूह-अ में कक्षा आठ की तनु प्रिया ने प्रथम स्थान हासिल किया.
कक्षा सात के आदित्य कुमार दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कक्षा आठ की परिधि कश्यप ने तीसरा स्थान प्राप्त किया.
इस वर्ग के विद्यार्थियों की रचनाओं में उनकी उम्र के अनुरूप विषयों को लेकर सोच और अपनी भाषा में अभिव्यक्ति देखने को मिली. पुरस्कार मिलने से विद्यार्थियों में आगे भी मैथिली में लिखने का उत्साह बढ़ा.
वर्ग नौ से 12 में अंकित कुमार ने जीता पहला स्थान
वर्ग नौ से 12 के समूह-ब में कक्षा 10 के अंकित कुमार ने प्रथम स्थान हासिल किया. कक्षा नौ की पावनी गुप्ता दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि कक्षा नौ की पावनी कुमारी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया.
सफल विद्यार्थियों को अतिथियों ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया. मंच से अपनी रचनाओं का वाचन करते हुए विद्यार्थियों ने यह भी दिखाया कि मातृभाषा में लेखन के लिए बच्चों को अवसर मिलने पर वे अपनी रचनात्मकता को बेहतर तरीके से सामने ला सकते हैं.
साहित्यकारों ने बच्चों का बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध मैथिली साहित्यकार और व्यंग्यकार शैलेन्द्र कुमार मिश्र रहे. युवा साहित्यकार एवं शिक्षाविद मुख्तार आलम मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद थे.
मैथिली भाषा शोध परिषद के निदेशक हीरेन्द्र कुमार झा और कार्यालय सचिव प्रभात ठाकुर भी समारोह में उपस्थित रहे. उन्होंने बच्चों के प्रयास की सराहना की और मैथिली भाषा के प्रति उनकी रुचि को महत्वपूर्ण बताया.
मौके पर विद्यालय के उप-प्राचार्य पिंकी कुमारी और वरिष्ठ शिक्षक अजय कुमार झा भी मौजूद थे. कार्यक्रम के सफल आयोजन में अजय कुमार झा की सक्रिय भूमिका रही.
Maithili Writing Competition Saharsa: मातृभाषा से जुड़ेंगे बच्चे तो मजबूत होगी भाषा
ऐसे आयोजनों का असर केवल पुरस्कार तक सीमित नहीं रहता. स्कूल स्तर पर बच्चों को मैथिली में लिखने, पढ़ने और मंच पर अपनी रचना प्रस्तुत करने का अवसर मिलने से भाषा के प्रति उनका जुड़ाव मजबूत होता है.
मैथिली जैसी क्षेत्रीय भाषाओं के लिए नई पीढ़ी का जुड़ाव महत्वपूर्ण है. प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी भाषा में सोचने और उसे शब्दों में व्यक्त करने का अवसर मिला. अब जरूरत इस बात की है कि ऐसे आयोजन नियमित रूप से होते रहें, ताकि बच्चों की रचनात्मकता के साथ मातृभाषा का संरक्षण भी आगे बढ़े.
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन की ओर से अतिथियों, शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया.
