Saharsa Mahishi Ugratara Son: बिहार के सहरसा जिले स्थित सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ मां उग्रतारा धाम की महिमा और धार्मिक अस्मिता अब इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए दुनिया भर के श्रद्धालुओं तक पहुंच रही है. महिषी गांव की रहने वाली आकांक्षा चौधरी ने अपनी माटी और मां उग्रतारा के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा को शब्दों में पिरोकर एक बेहद सुंदर भक्ति गीत तैयार किया है. 'मां उग्रतारा' शीर्षक से रिलीज हुए इस भक्ति गीत ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आते ही मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
महिषी की माटी का आत्मीय जुड़ाव और सुरों का अद्भुत संगम
इस भक्ति गीत की सबसे बड़ी खासियत इसका स्थानीय और आत्मीय जुड़ाव है. गीत की रचनाकार आकांक्षा चौधरी का जन्म और परवरिश इसी महिषी गांव में हुई है, जहां मां उग्रतारा का भव्य और प्रसिद्ध मंदिर स्थापित है. बचपन से जिस पावन धाम की अलौकिक शक्ति और गाथाएं सुनकर वे बड़ी हुईं, उसी धाम के लिए जब उन्होंने कलम उठाई तो शब्द सीधे हृदय से निकलकर पन्नों पर उतर आए. इस आत्मीय भाव को अपनी सुरीली आवाज से सजाया है प्रसिद्ध गायक टिंकू झा ने, जबकि संगीतकार विशाल बाबू झा ने अपने कर्णप्रिय संगीत से गीत में नई जान फूंक दी है. जब आकांक्षा के रचित शब्द, टिंकू झा का सुर और विशाल बाबू झा की स्वर लहरी एक साथ मिले, तो एक अद्भुत भक्तिमय माहौल बन गया.
डिजिटल मंचों पर गूंज रही मां उग्रतारा की महिमा
यह विशेष भक्ति गीत 'सिम्मर फिल्मस इंटरनेशनल दरभंगा' की प्रस्तुति के रूप में रिलीज किया गया है. संस्था ने इसे यूट्यूब सहित सभी प्रमुख डिजिटल मंचों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कराया है, ताकि देश-विदेश में बैठे मां उग्रतारा के भक्त घर बैठे धाम की आध्यात्मिक अनुभूति कर सकें. गीत के जरिए श्रद्धालुओं तक मां उग्रतारा की महिमा और धाम की धार्मिक पहचान को पहुंचाने का ईमानदार प्रयास किया गया है. इंटरनेट पर रिलीज होते ही इसे काफी पसंद किया जा रहा है. स्थानीय लोग और प्रवासी मैथिल इस गीत को सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर कर रहे हैं.
मिथिला और बिहार के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की अनूठी पहल
सिम्मर फिल्मस इंटरनेशनल केवल एक भक्ति गीत तक सीमित नहीं है, बल्कि उसने बिहार और मिथिला के ऐतिहासिक व पौराणिक तीर्थस्थलों की लोक-आस्था को उजागर करने का बीड़ा उठाया है. संस्था के संस्थापक और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक सुमित सुमन ने बताया कि बिहार और मिथिलांचल की धरती आदिकाल से ही अध्यात्म, ज्ञान और महान लोक-परंपराओं का केंद्र रही है. आज के डिजिटल दौर में हमारी नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक जड़ों से जोड़े रखना बेहद जरूरी है. इसी उद्देश्य से संस्था द्वारा प्रसिद्ध तीर्थस्थलों और देवी-देवताओं पर आधारित भक्ति गीतों की एक पूरी श्रृंखला तैयार की जा रही है.
स्थानीय पहचान को मिला नया राष्ट्रीय मंच
सुमित सुमन ने कहा कि लोक-आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक महत्व को केंद्र में रखकर गीतों का निर्माण करना और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना ही उनकी संस्था का मुख्य ध्येय है. सहरसा का महिषी धाम न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह विद्वता और शास्त्रार्थ की ऐतिहासिक भूमि भी रही है. ऐसे में 'मां उग्रतारा' गीत के माध्यम से इस पावन धाम की महत्ता को व्यापक स्तर पर पहुंचाया जा रहा है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भक्ति गीतों की यह सांस्कृतिक श्रृंखला आगे भी अनवरत जारी रहेगी और जल्द ही मिथिला के अन्य प्रमुख तीर्थस्थलों पर आधारित गीत भी श्रोताओं के सामने लाए जाएंगे.
Saharsa Mahishi Ugratara Son: श्रद्धालुओं में खुशी की लहर और नया सांस्कृतिक प्रभाव
इस गीत के रिलीज होने से महिषी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में खुशी और गर्व का माहौल है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब गांव की ही बेटी अपने क्षेत्र की पहचान को संगीतमय मंच पर रखती है, तो यह पूरे समाज के लिए सम्मान की बात होती है. डिजिटल युग में इस प्रकार के सांस्कृतिक और धार्मिक प्रयासों से सुदूर क्षेत्रों में स्थित प्राचीन मंदिरों और तीर्थों को भी नई पहचान मिलती है. इससे न केवल पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को बढ़ावा मिलता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी लोक-संस्कृति और जड़ों से गर्व के साथ जुड़ी रहती हैं.
