सहरसा में जीविका दीदियों को मिलेगा समय पर लोन, सहरसा में बैंक और जीविका की बड़ी बैठक

Jeevika Bank: महिलाओं की आर्थिक मजबूती पर फोकस, व्यवसाय बढ़ाने और लंबित मामलों के समाधान पर बनी रणनीति

सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट

Jeevika Bank: सहरसा. ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बुधवार को एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली. जीविका और बिहार ग्रामीण बैंक के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समन्वय बैठक में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को समय पर ऋण उपलब्ध कराने, लंबित बैंकिंग मामलों का त्वरित निष्पादन करने और ग्रामीण क्षेत्रों में नए व्यवसायिक अवसर विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया. बैठक में अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि जीविका दीदियों की आर्थिक उड़ान को नई गति देने के लिए बैंक और जीविका के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है.

समय पर ऋण वितरण पर दिया गया जोर

बैठक की अध्यक्षता जिला परियोजना प्रबंधक जीविका श्लोक Kumar और बिहार ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक अजीत झा ने संयुक्त रूप से की. बैठक में जिले के सभी प्रखंड परियोजना प्रबंधक, वित्तीय समावेशन नोडल, बैंक शाखा प्रबंधक और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे.

बैठक के दौरान जिला परियोजना प्रबंधक श्लोक कुमार ने निर्देश दिया कि जीविका से जुड़े सभी लंबित आवेदनों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित किया जाये. उन्होंने कहा कि बचत खाता खोलने, ऋण से जुड़े खातों को सक्रिय करने और स्वयं सहायता समूहों को समय पर लोन उपलब्ध कराने में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में बैंकों की भूमिका बेहद अहम है और इसके लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा.

व्यवसाय विस्तार की संभावनाओं पर मंथन

बैठक में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के लिए नये व्यवसायिक अवसर विकसित करने पर भी विस्तार से चर्चा की गयी. अधिकारियों ने कहा कि अगर ग्रामीण महिलाओं को समय पर वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण मिले तो वे छोटे व्यवसाय से लेकर बड़े उद्यम तक सफलतापूर्वक संचालित कर सकती हैं.

प्रखंड परियोजना प्रबंधकों ने अपने-अपने क्षेत्रों के लंबित बैंकिंग मामलों की जानकारी साझा की, जिस पर बैंक अधिकारियों ने शीघ्र समाधान का भरोसा दिया.

उत्कृष्ट कार्य करने वालों को किया गया सम्मानित

बैठक के दौरान वर्ष 2024-25 में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बीपीएम और वित्तीय समावेशन नोडल कर्मियों को सम्मानित भी किया गया. अधिकारियों ने कहा कि ऐसे प्रयासों से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है और ग्रामीण महिलाओं तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचता है.

बैठक के अंत में सभी अधिकारियों ने वित्तीय समावेशन को और मजबूत बनाने तथा ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और व्यवसाय के नये अवसर विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहरायी.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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