Saharsa News : जमुई में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुई दरिंदगी की खौफनाक घटना ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है. इस अमानवीय कृत्य को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी (सीपीएम) ने घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सहरसा में सीपीएम जिला कमेटी के सचिव एवं पार्टी के राज्य सचिव मंडल सदस्य रणधीर यादव ने बयान जारी कर कहा कि इस जघन्य वारदात ने देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में बिहार का सिर शर्म से झुका दिया है. उन्होंने दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी और उन्हें कठोरतम सजा देने की मांग की है.
'रोते-बिलखते रहे पीड़ित, बेखौफ दरिंदों ने की हदें पार'
घटना के संवेदनशील और अमानवीय पहलू को उजागर करते हुए सीपीएम नेता रणधीर यादव ने कहा कि जमुई में जो हुआ वह इंसानियत को तार-तार करने वाला है. पीड़ित नाबालिग लड़की और उसका दोस्त दरिंदों के सामने लगातार हाथ जोड़ते रहे, रोते-बिलखते और गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन हैवानियत पर उतारू भीड़ का दिल एक पल के लिए भी नहीं पिघला. उन्होंने कहा कि ऐसी दिल दहला देने वाली घटनाएं किसी भी सभ्य समाज के लिए एक बदनुमा दाग हैं. जब अपराधी इतने बेखौफ हो जाएं कि मासूमों की चीख-पुकार का उन पर कोई असर न पड़े, तो समझ लेना चाहिए कि अपराधियों के मन से पुलिस और कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है.
सुशासन के दावों की हवा निकली, पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल
रणधीर यादव ने राज्य में सुशासन और अपराध नियंत्रण के सरकारी दावों पर करारा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि सरकार आए दिन सूबे में कानून-व्यवस्था मजबूत होने और अपराध मुक्त बिहार का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. आज बिहार के अलग-अलग कोनों से आए दिन हमारी बेटियों और महिलाओं के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों की खबरें सामने आ रही हैं. उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि ऐसी घटनाओं को रोकने में राज्य का पुलिस प्रशासन आखिर क्यों नाकाम साबित हो रहा है. क्या पुलिस तंत्र केवल मूकदर्शक बना रहेगा या अपराधियों में कोई खौफ पैदा करेगा.
सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और त्वरित न्याय की उठी मांग
नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की पहली और प्राथमिक जिम्मेदारी बताते हुए सीपीएम नेता ने कहा कि केवल बयानों से काम नहीं चलेगा. जमुईकांड में न्याय की दिशा में त्वरित और ठोस कदम उठाए जाने चाहिए. उन्होंने बिहार सरकार से मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए. घटना में शामिल हर एक दोषी को चिन्हित कर उसके खिलाफ कानून की सख्त धाराओं के तहत केस चलाया जाए ताकि पीड़ितों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके और भविष्य में कोई भी हैवान ऐसा दुस्साहस करने की हिम्मत न कर सके.
Saharsa News: असर और आगे की राजनीतिक स्थिति
जमुई की इस दुखद घटना का असर अब केवल एक जिले तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह पूरे बिहार का एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है. सहरसा से लेकर पटना तक वामपंथी दलों और महिला संगठनों ने सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए मोर्चा खोल दिया है. सीपीएम ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए जल्द ही कोई प्रभावी और ठोस कदम नहीं उठाए, तो पार्टी आम जनता को साथ लेकर सड़कों पर उतरने के लिए विवश होगी. फिलहाल इस मामले ने प्रशासनिक जवाबदेही और पुलिस महकमे की कार्यशैली पर गहरे सवाल दाग दिए हैं.
