एक ही सिस्टम से हो जाएगा खेतों में पटवन व कीटनाशक का छिड़काव

एक ही सिस्टम से हो जाएगा खेतों में पटवन व कीटनाशक का छिड़काव

लघु व सीमांत किसानों को दिया जा रहा 80 प्रतिशत अनुदान सहरसा . जिले के किसानों के लिए खेती को आसान, आधुनिक व लाभकारी बनाने की दिशा में एक नयी पहल की गयी है. अब खेती से जुड़े कई काम एक ही मशीन से संभव हो सकेंगे. ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर ड्रिप सिस्टम मशीन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. बाजार में आयी यह नयी मशीन किसानों को अपनी तरफ खींच रही है. इस आधुनिक तकनीक के जरिए खेतों में सिंचाई के साथ कीटनाशक दवाओं का एक साथ छिड़काव किया जा सकेगा. इससे किसानों के समय, मेहनत व लागत तीनों की बचत होगी. नहीं होती पानी की बर्बादी आज के समय में खेती में सबसे बड़ी चुनौती पानी, बिजली व श्रम की बढ़ती लागत है. ऐसे में यह मिनी ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर ड्रिप सिस्टम मशीन किसानों की इन समस्याओं का समाधान लेकर आयी है. यह मशीन फसलों की जड़ों तक सीधे व समान मात्रा में पहुंचाती है. जिससे पानी की बर्बादी नहीं होती. इसके साथ ही इसी सिस्टम से कीटनाशक व उर्वरक का छिड़काव भी किया जा सकता है. इससे फसलों को समय पर दवा मिलती है व उत्पादन बेहतर होता है. मजदूरों की लागत की होती है बचत यह तकनीक खासकर उन किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी जो बड़े पैमाने पर खेती करते हैं. हालांकि, सरकार की ओर से मिलने वाले अनुदान के कारण छोटे व मध्यम किसान भी इसे आसानी से अपना सकते हैं. इस मशीन की खास बात यह है कि यह पानी की खपत को काफी हद तक कम करती है. इसके साथ ही बिजली की बचत करती है. सिंचाई का दायरा बढ़ाती है. इससे खेतों में बार-बार पटवन कराने की झंझट खत्म हो जाती है व दवा छिड़काव के लिए अलग से मजदूर लगाने की जरूरत भी नहीं पड़ती. 80 प्रतिशत दिया जा रहा अनुदान इस कारोबार से जुड़े व्यापारी पप्पू कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत यह स्प्रिंकलर ड्रिप सिस्टम यंत्र किसानों को अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस सिस्टम के माध्यम से खेतों में पानी का फव्वारा भी किया जा सकता है. ड्रिप के जरिए पटवन भी हो सकता है. साथ ही कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी किया जा सकता है. यह पूरी तरह से ऑटोमेटिक सिस्टम है. जिससे किसान को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. सरकार इस सिस्टम को लगाने पर 80 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है. कुल लागत का सिर्फ 20 प्रतिशत ही किसान को देना पड़ता है. इससे किसानों पर आर्थिक बोझ कम होता है एवं वे आधुनिक तकनीक को अपनाने के लिए प्रोत्साहित होते हैं. खेतों में यह सिस्टम लगाने से बिजली की खपत कम होगी, सिंचाई अधिक प्रभावी होगी और फसलों की गुणवत्ता में सुधार आएगा. कुल मिलाकर, मिनी ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर ड्रिप सिस्टम मशीन खेती को स्मार्ट एवं टिकाऊ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. यह न सिर्फ किसानों की समस्याओं को कम करेगा, बल्कि उनकी आमदनी बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगा. आधुनिक तकनीक एवं सरकारी सहयोग से अब किसान कम लागत में ज्यादा उत्पादन कर सकेंगे. लघु व सीमांत किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान सहायक निदेशक उद्यान शैलेंद्र कुमार ने बताया कि लघु एवं सीमांत किसानों को इस डीप स्प्रिंकल लगाने के लिए 80 प्रतिशत सरकार अनुदान दे रही है. जबकि पांच एकड़ से अधिक के किसानों को 70 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है. एक एकड़ में डीप स्प्रिंकल लगाने के लिए एक लाख से अधिक खर्च आता है. जिसमें 80 प्रतिशत सरकार अनुदान देती है. किसान अपने सुविधा के अनुसार किसी भी कंपनी से ऑनलाइन आवेदन कर इसका इंस्टॉलेशन करा सकते हैं. इसके लिए एक नलकूप की भी आवश्यकता होती है. जिस पर लगभग 32 हजार रूपये खर्च आता है. जो राशि सरकार वहन करती है. किसान द्वारा नलकूप लगाकर उसके खर्च सहित खरीद की रसीद जमा करने के बाद राशि दिया जाता है. उन्होंने बताया कि यह आधुनिक कृषि के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति के रूप में सामने आया है. हर किसानों को इसका लाभ लेना चाहिए.

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