डीएवी में मनाया गया दयानंद सरस्वती का जन्मोत्सव सहरसा . डीएवी पब्लिक स्कूल में बुधवार को स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म दिवस हर्षोल्लास व धूमधाम से मनाया गया. जन्मदिन के अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ संजय कुमार ने अपने सहयोगियों व बच्चों के साथ स्वामीजी की तस्वीर पर माल्यार्पण कर महान विभूति को याद किया. माल्यार्पण के बाद प्राचार्य ने शिक्षकों व बच्चों के साथ आर्य समाज की पद्धति के अनुसार हवन किया. उन्होंने बताया कि हवन मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा व शारीरिक शुद्धि प्रदान करता है. यह वैदिक मंत्रो के साथ औषधि सामग्रियों के प्रयोग से वातावरण को शुद्ध करती है. महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन पर प्रकाश डालते प्राचार्य ने बताया कि स्वामी जी का जन्म 12 फरवरी 1824 को गुजरात की टंकारा में ब्राह्मण परिवार में हुआ था. स्वामीजी की मृत्यु के तीन वर्ष बाद दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज ट्रस्ट एंड मैनेजमेंट सोसायटी जिसे लोकप्रिय रूप से डीएवी के नाम से जाना जाता है, की स्थापना कर डीएवी आंदोलन की शुरुआत की. उनके शैक्षिक विचार को मूर्त रूप प्रदान करने के लिए एक जून 1886 में पहले डीएवी हाई स्कूल की स्थापना महात्मा हंसराज ने की, जो अब विशाल आयाम ले चुका है. प्राचार्य ने बताया कि स्वामी दयानंद वेदों को सर्वोच्च प्रामाणिक ग्रंथ मानते थे. जो सत्य विद्या का स्रोत है एवं धर्म-अधर्म का निर्णय करते हैं. स्वामीजी ने भारतीय समाज को अंधविश्वास एवं कुरीतियों से निकालकर वेदों की शुद्ध शिक्षाओं को अपनाने का आह्वान किया एवं कहा वेदों की ओर लौटो. प्राचार्य ने बच्चों को वेद में वर्णित मंत्र को याद करने एवं वेद को पढ़ने के लिए प्रेरित किया.
हवन से मिलती है मानसिक शांति व सकारात्मक ऊर्जाः डॉ संजय
हवन से मिलती है मानसिक शांति व सकारात्मक ऊर्जाः डॉ संजय
