तकनीकी जानकारी के अभाव में मछली पालक को लाखों का नुकसान, मत्स्य विभाग से प्रशिक्षण की मांग

आधुनिक तकनीक से मछली पालन शुरू करने वाले संजीव कुमार सिंह को तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की कमी से भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. पानी की गुणवत्ता, आहार और रोग नियंत्रण की वैज्ञानिक जानकारी न होने से मछलियों की मौत हो रही है.

Fish Farming: सहरसा जिले के सोनवर्षा राज नगर पंचायत के वार्ड संख्या-1 निवासी संजीव कुमार सिंह उर्फ कलाकार ने स्वरोजगार और परिवार के भरण-पोषण के उद्देश्य से आधुनिक टैंक बनाकर मछली पालन शुरू किया. करीब सात से आठ लाख रुपये की लागत से तैयार किए गए इस प्रोजेक्ट से उन्हें अच्छी आय की उम्मीद थी, लेकिन तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के अभाव में अब उन्हें लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

आत्मनिर्भर बनने के लिए शुरू किया था मछली पालन

संजीव कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने परिवार की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने के उद्देश्य से आधुनिक टैंक का निर्माण कराया. शुरुआत में उन्हें उम्मीद थी कि मछली पालन से नियमित आमदनी होगी, लेकिन पर्याप्त तकनीकी जानकारी नहीं मिलने के कारण उनकी योजना प्रभावित हो गई.

मछलियों की मौत से बढ़ रहा आर्थिक नुकसान

उन्होंने बताया कि पानी की गुणवत्ता, ऑक्सीजन की मात्रा, संतुलित आहार और रोग नियंत्रण की वैज्ञानिक जानकारी नहीं मिलने से टैंक में लगातार मछलियां मर रही हैं. इससे उनकी पूंजी और मेहनत दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ा है.

तकनीकी मार्गदर्शन नहीं मिलने से परेशानी

संजीव कुमार सिंह का कहना है कि सरकार मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है और जिला मुख्यालय में मत्स्य विभाग के अधिकारी भी तैनात हैं. इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों के मछली पालकों को नियमित तकनीकी सलाह, प्रशिक्षण और निगरानी की समुचित व्यवस्था नहीं मिल रही है.

प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मत्स्य विभाग समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित करे, टैंकों का निरीक्षण करे और वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन की जानकारी दे, तो ऐसे नुकसान से बचा जा सकता है. इससे किसानों की आय बढ़ेगी और क्षेत्र में मत्स्य उत्पादन को भी प्रोत्साहन मिलेगा.

मत्स्य विभाग से सहायता की मांग

Fish Farming: ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग से मछली पालकों को नियमित तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि छोटे किसान आत्मनिर्भर बन सकें और आर्थिक नुकसान से बच सकें.


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By Prabhat khabar news desk

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