मकर संक्रांति पर उग्रतारा को लगा छप्पन भोग
तंत्र साधकों ने देर रात हवन तर्पण व तांत्रिक साधना की.
मंदिर में श्रद्धालुओं की लगी रही भीड़ महिषी मुख्यालय स्थित सिद्ध शक्तिपीठ व गुरु वशिष्ठ व भगवान बुद्ध की आराध्या उग्रतारा के मंदिर में मकर संक्रांति के अवसर पर पारंपरिक रूप से मंदिर पुजारी व श्रद्धालुओं के सहयोग से छप्पन भोग लगाया गया. ऐसी मान्यता है कि इस विशिष्ट तिथि में गुरु वशिष्ठ व भगवान बुद्ध ने वैदिक व चीनाचार पद्धति से शक्ति के तीनों मूल बीजों महाकाली, महालक्ष्मी व महासरस्वती के समन्वित स्वरूप में प्रतिस्थापित माता की पूजा अर्चना कर सर्वसिद्धि प्राप्त की थी व जगत कल्याण किया था. आज भी मंदिर पुजारी व ग्रामीणों के द्वारा इस तिथि में छप्पन भोग लगाने की परंपरा का निर्वहन किया जाता है. नव धान्य से निर्मित खिचड़ी, पुलाव, तस्मै के संग विशिष्ट व्यंजन, फल व मिष्टान्न सहित हर संभव प्रसाद का भोग परोस विशिष्ट पूजा की गयी. मंदिर पुजारी शुभकांत झा, सुंदरकांत झा, प्रमोद झा, विवेकानंद झा सहित सभी पंडा परिवार के सदस्यों ने सभी जीवों व वनस्पतियों के कल्याण का संकल्प ले माता को अलग-अलग भोग लगाया. सुदूर प्रदेशों से सैकड़ों लोगों ने मंदिर पहुंच पूजा में शामिल हो व महाप्रसाद पाकर अभीष्ट सिद्धि की कामना की. तंत्र साधकों ने देर रात हवन तर्पण व तांत्रिक साधना की. लोगों का आवागमन बंद होने पर यह साधना किए जाने का प्रावधान है. गांव की सभी परिवार के सदस्यों ने भी माता को नमन कर आशीर्वाद लिया.
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