अप्रैल महीने में हो रही जून की गर्मी का एहसास

अप्रैल महीने में हो रही जून की गर्मी का एहसास

बढ़ती गर्मी से हर घर लोग हो रहे बीमार, अगले चार दिनों तक गर्मी बढ़ने की संभावना सहरसा . इस वर्ष अप्रैल महीने में ही सबसे अधिक गर्मी पड रही है. जबकि आगे पूरा अप्रैल, मई, जून व जुलाई महीना बाकी है. अप्रैल महीने में ही गर्मी अपने शबाब पर है. सुबह होते ही पारा 25 के पार होना शुरू हो जाता है. दोपहर होते यह 37 डिग्री के पार पहुंच जा रहा है. साथ ही सडकों पर लू चलने लगती है. इस भीषण गर्मी में मनुष्य की कौन कहे, पशु पक्षी भी बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. इस गर्मी से मौसम के फलों आम, लीची, कटहल की उपज पर भी अब असर पड़ने लगा है. पेडों में लदे आम के टिकोले गिर रहे हैं. लीची व कटहल की भी यही स्थिति है. फलों में वृद्धि रूक गयी है. उत्पादक किसानों की स्थिति भी खराब हो रही है. साथ ही गर्मी से सब्जियों के फलन पर भी असर पडने लगा है. जिससे इनके कीमतों में उछाल आ रहा है. इस वर्ष अप्रैल महीने में गर्मी ने सभी रिकार्ड तोड दिये हैं. लेकिन तुलनात्मक विश्लेषण में यह साफ हो रहा है कि पिछले पांच वर्षों से प्रत्येक वर्ष अप्रैल महीने में गर्मी में इजाफा हुआ है. जबकि पिछले पांच वर्ष में अप्रैल महीने में वर्षा भी हुई थी. लेकिन इस वर्ष वर्षा भी नदारद है. साथ ही मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक वर्षा की संभावना तक नहीं जताई है. अप्रैल में जून की गर्मी का एहसास अप्रैल महीना ही जून की तरह बन गया है. गर्मी से लोगों की जान पर बन आयी है. लोगों के बीमार होने की संख्या में एकाएक तेजी आ गयी है. बच्चे से लेकर युवा, बूढे सभी परेशानी झेल रहे हैं. बुजूर्गों की माने तो आजतक अप्रैल महीने में इतनी भीषण गर्मी व लू शायद ही कभी चली हो. जरा सी लापरवाही से उल्टी-दस्त की समस्या होने की पूरी संभावना रहती है. गर्मी में अपनी दिनचर्या एवं खाने पीने का ख्याल रखने से ही बचा जा सकता है. इससे बचने के लिए सिजनल फल, सब्जियों का सेवन करना चाहिए. गर्मी के मौसम में सूती वस्त्र ही पहनें. सूती वस्त्र पसीना सोखने में कारगर होते हैं. जहां तक हो सके, ठंडे पानी से ही स्नान करें. कहा भी गया है कि स्वास्थ्य ही धन है. अपने खान-पान, रहन-सहन पर इस मौसम में ध्यान रखें तो गर्मी को परास्त कर सकते हैं. गर्मी में ताजा व हल्का करें भोजन जेनरल फिजिसियन डॉ तारिक ने कहा कि गर्मी में डाइट का बहुत ख्याल रखना चाहिए. ऐसी चीजें खानी चाहिए, जो हल्की हों एवं आसानी से पच जाऐ. ज्यादा से ज्यादा फलों का सेवन करना चाहिए. जितनी भूख हो, उससे थोड़ा कम खायें एवं ज्यादा तेल मसाले वाले खाने से परहेज करें. गर्मी में स्वस्थ रहने के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे ज्यादा जरूरी है. गर्मी का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है. बदलते मौसम में होने वाली बीमारियां उन्हें आसानी से जकड़ लेती हैं. इसलिए उनके खानपान पर खास ध्यान दें. जंक फूड, नूडल्स बिल्कुल भी ना दें. दोपहर के समय बच्चों को खेलने के लिए घर से बाहर नहीं जाने दें. आमलोगों को भी दिन भर में ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए. इसके अलावा जूस, दही, दूध, छाछ, लस्सी, नींबू पानी, ग्लूकोज पीते रहना चाहिए. इस मौसम में तरबूज एवं खीरा जैसे पानी वाले फल का सेवन जरूर करना चाहिए. फलों का सेवन करने से शरीर में पानी की कमी को आसानी से पूरा किया जा सकता है. गर्मी में हरी सब्जियों का सेवन ज्यादा करना चाहिए. गर्मी में लौकी, करेला एवं भिंडी जैसी सीजन की सब्जियां जरूर खायें. खाने में दही, छाछ एवं लस्सी को शामिल करना चाहिए. इसके अलावा रोज नींबू पानी पियें. धूप से आने के बाद कुछ देर रूक कर पानी पियें एवं इससे भी ज्यादा जरूरी है कि आप फ्रिज के पानी पीने से बचें. घर से निकलना मजबूरी हो तो बैग में पानी का बोतल जरूर रखें. गर्मी के मौसम में शरीर में पानी के स्तर को बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. गर्मियों में कैफीनयुक्त चीजों को खाने-पीने से बचना चाहिए. खासकर चाय के सेवन से. नाश्ते में चाय की जगह जूस लें एवं घर से बिना कुछ खाये नहीं निकलें.

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By Dipankar Shriwastaw

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