लोक देवता बाबा गणिनाथ गोविंद की 94वीं जयंती के अवसर पर सहरसा में शुक्रवार से दो दिवसीय धार्मिक एवं सामाजिक महोत्सव शुरू होगा. अखिल भारतीय मध्य देशीय वैश्य समाज की ओर से आयोजित इस समारोह को लेकर समाज के लोगों में खासा उत्साह है. कोसी क्षेत्र के अलग-अलग गांवों से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है.
कला भवन से गणिनाथ गोविंद धाम तक जाएगा काफिला
महोत्सव का मुख्य आकर्षण शुक्रवार को निकलने वाली भव्य शोभायात्रा होगी. आयोजन समिति के अनुसार शोभायात्रा सुपर बाजार स्थित कला भवन परिसर से शुरू होगी. बाबा गणिनाथ गोविंद की जयकारों के बीच श्रद्धालु, समाज के पदाधिकारी और युवा कार्यकर्ता वाहनों के काफिले के साथ शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कहरा प्रखंड के बलहाडीह मंदिर टोला स्थित गणिनाथ गोविंद धाम पहुंचेंगे.
धर्मसभा के बाद शुरू होगा 24 घंटे का अखंड जागरण
गणिनाथ गोविंद धाम पहुंचने के बाद शोभायात्रा धर्मसभा में बदल जाएगी. यहां बाबा गणिनाथ गोविंद के जीवन, उनके आदर्शों और समाज के प्रति दिए गए संदेश पर चर्चा होगी. इसके बाद 24 घंटे का अखंड जागरण आयोजित किया जाएगा. इस दौरान भजन-कीर्तन, प्रवचन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होंगे. श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद और भोजन की भी व्यवस्था की गई है.
हवन और विशेष पूजा के साथ होगा समापन
महोत्सव के दूसरे दिन 12 सितंबर को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन, संध्या वंदना और विशेष पूजा-अर्चना होगी. धार्मिक अनुष्ठानों के बाद दो दिवसीय जयंती समारोह का समापन किया जाएगा. जिलाध्यक्ष रामकृष्ण साह उर्फ मोहन साह ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी बाबा गणिनाथ गोविंद की जयंती श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता के साथ मनाई जा रही है.
गांव-गांव पहुंच रहे युवा कार्यकर्ता
समारोह को लेकर युवा कार्यकर्ताओं की टीम भी सक्रिय है. कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर समाज के लोगों को जयंती समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दे रहे हैं. आयोजकों को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से समारोह भव्य रूप लेगा.
संगमरमर का मंदिर बना आस्था का केंद्र
बलहाडीह मंदिर टोला स्थित गणिनाथ गोविंद धाम में संगमरमर से निर्मित भव्य मंदिर श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है. आयोजन समिति से जुड़े लोगों के अनुसार बाबा गणिनाथ की परंपरा का संबंध वैशाली के महनार स्थित गंगा तट के पलवैया से बताया जाता है.
स्वप्न में दर्शन की मान्यता से जुड़ा है धाम
मान्यता के अनुसार गंगा कटाव के दौरान बाबा गणिनाथ गोविंद ने बलहाडीह निवासी झिंगुर दास को स्वप्न में दर्शन देकर यहां प्रवास की इच्छा जताई थी. इसके बाद यहां मंदिर की स्थापना हुई और पूजा-अर्चना तथा धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा शुरू हुई. आज गणिनाथ गोविंद धाम धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है.
