DPM के अतिरिक्त प्रभार पर जिला स्वास्थ्य समिति में बगावत, 35 अधिकारियों-कर्मियों ने DM से की शिकायत

सहरसा जिला स्वास्थ्य समिति के 35 अधिकारी व कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से जिलाधिकारी को आवेदन सौंपकर DPI (जिला योजना प्रबंधक) के अतिरिक्त प्रभार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने मानव संसाधन नीति के अनुरूप योग्य अधिकारी को प्रभार देने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

Saharsa news: सहरसा. जिला स्वास्थ्य समिति में डीपीएम के अतिरिक्त प्रभार को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से जिला पदाधिकारी-सह-अध्यक्ष, जिला स्वास्थ्य समिति को आवेदन भेजा है. आवेदन पर जिला स्वास्थ्य समिति के विभिन्न पदों पर कार्यरत कुल 35 अधिकारियों एवं कर्मचारियों के हस्ताक्षर हैं. इसमें डीपीएम का प्रभार मानव संसाधन नीति के अनुरूप किसी योग्य, अनुभवी एवं वरीय अधिकारी को देने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गयी है.

डीपीएम के स्थानांतरण के बाद शुरू हुआ विवाद

संयुक्त आवेदन के अनुसार राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के पत्रांक 1492, दिनांक 12 जून 2026 के तहत तत्कालीन डीपीएम के स्थानांतरण के बाद नए डीपीएम की व्यवस्था की जानी थी. आवेदनकर्ताओं का आरोप है कि इसके बजाय जिला स्वास्थ्य समिति के पत्रांक 1171, दिनांक 30 जून 2026 के माध्यम से अस्पताल प्रबंधक सिंपी कुमारी को डीपीएम का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया.आवेदनकर्ताओं ने इस निर्णय को मानव संसाधन नीति की मूल भावना के विपरीत बताते हुए कहा है कि जिला स्वास्थ्य समिति में कई अनुभवी एवं वरीय अधिकारी उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें जिम्मेदारी नहीं दी गई.

नियंत्री पदाधिकारी की सहमति को लेकर भी सवाल

आवेदन में दावा किया गया है कि अस्पताल प्रबंधक का नियंत्री पदाधिकारी प्रभारी अधीक्षक होता है. इसके बावजूद प्रभारी अधीक्षक एवं नियंत्री पदाधिकारी की सहमति के बिना अस्पताल प्रबंधक को उनके मूल कार्यों के अतिरिक्त डीपीएम का प्रभार दिया गया.अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने इस पूरी प्रक्रिया की प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा कराने की मांग की है.

दोहरी जिम्मेदारी की क्षमता पर उठाए सवाल

आवेदनकर्ताओं का कहना है कि अस्पताल प्रबंधक का पद पहले से ही अस्पताल संचालन, आपातकालीन सेवाओं, संसाधन प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों से जुड़ा है. वहीं डीपीएम का दायित्व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों, वित्तीय प्रबंधन, निगरानी एवं मूल्यांकन से संबंधित होता है.ऐसे में दोनों महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी एक ही अधिकारी को सौंपे जाने से कार्यों की गुणवत्ता और योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है.

स्वास्थ्य सूचकांकों में गिरावट का दावा

संयुक्त आवेदन में वर्तमान व्यवस्था के कारण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े कई कार्य प्रभावित होने का दावा किया गया है. आवेदनकर्ताओं ने जिले के विभिन्न स्वास्थ्य सूचकांकों में गिरावट और कार्य निष्पादन की गुणवत्ता प्रभावित होने की बात कही है. हालांकि आवेदन में इसके समर्थन में किसी विशिष्ट आंकड़े का उल्लेख नहीं किया गया है.

अधिकारियों-कर्मचारियों पर दबाव का भी आरोप

आवेदन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाए जाने का आरोप भी लगाया गया है. आवेदनकर्ताओं का कहना है कि बिना समुचित समीक्षा के अधिकारियों और कर्मचारियों पर आरोप लगाए जाने से उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है तथा कार्यस्थल का वातावरण भी प्रतिकूल हो रहा है.

सीसीटीवी से ऑडियो रिकॉर्डिंग का आरोप

संयुक्त आवेदन में जिला स्वास्थ्य समिति के विभिन्न पदाधिकारियों के कक्षों में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से ऑडियो रिकॉर्डिंग किए जाने का गंभीर आरोप भी लगाया गया है. आवेदनकर्ताओं ने इसे निजता से जुड़ा विषय बताते हुए जांच की मांग की है. हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.

डीपीएम का प्रभार बदलने और जांच की मांग

35 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मांग की है कि डीपीएम का अतिरिक्त प्रभार मानव संसाधन नीति के अनुरूप किसी योग्य, अनुभवी एवं वरीय अधिकारी को दिया जाए. साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है.

35 अधिकारियों-कर्मचारियों के हस्ताक्षर से बढ़ा विवाद

आवेदन पर जिला सामुदायिक समन्वयक, जिला निगरानी एवं मूल्यांकन पदाधिकारी, लेखा सहायक, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, प्रखंड सामुदायिक प्रबंधक, जैव चिकित्सा उपकरण अभियंता, वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक और डाटा प्रविष्टि ऑपरेटर समेत विभिन्न पदों पर कार्यरत 35 अधिकारियों एवं कर्मचारियों के हस्ताक्षर हैं.आवेदन की प्रतिलिपि क्षेत्रीय अपर निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, कोशी प्रमंडल, कार्यपालक निदेशक राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार तथा विभिन्न कर्मचारी संगठनों को भी भेजे जाने की बात कही गई है.

पहले भी उठ चुके हैं कार्यशैली को लेकर सवाल

सूत्रों के अनुसार अस्पताल प्रबंधक-सह-प्रभारी डीपीएम की कार्यशैली को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं. कुछ माह पूर्व सदर अस्पताल, सहरसा के चिकित्सा पदाधिकारियों ने भी जिला पदाधिकारी को आवेदन देकर कार्यस्थल के वातावरण, समन्वय और व्यवहार से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग की थी. हालांकि उन शिकायतों के संबंध में भी प्रशासनिक स्तर पर अंतिम निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है.

डीएम बोले- मामला अभी संज्ञान में नहीं

Saharsa news: मामले को लेकर पूछे जाने पर जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में अभी नहीं आया है.अब जिला प्रशासन के स्तर पर आवेदन प्राप्त होने और शिकायतों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि डीपीएम के प्रभार को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता है और आगे क्या प्रशासनिक निर्णय लिया जाता है.


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लेखक के बारे में

By अंजन आर्यन सिंह

पत्रकारिता में 14 वर्षों का अनुभव. अब तक लगातार सहरसा से क्राइम और स्वास्थ्य की खबरें संकलित करता हूं.

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