सहरसा: कहरा के देवना स्थित बाबा वाणेश्वर मंदिर में पूरी होती है हर मनोकामना; श्रावणी मेला व महाशिवरात्रि पर उमड़ता है आस्था का सैलाब

सहरसा के कहरा प्रखंड स्थित बाबा वाणेश्वर मंदिर शिव साधना और अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां गंगाजल और बेलपत्र से अभिषेक करने से भक्तों के सभी संकट दूर हो जाते हैं. श्रावण मास और महाशिवरात्रि पर यहां का नजारा अलौकिक होता है.

सहरसा जिले के कहरा प्रखंड अंतर्गत देवना स्थित पौराणिक 'बाबा वाणेश्वर मंदिर' शिव साधना, अटूट आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है. कोसी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि संपूर्ण बिहार और सीमावर्ती इलाकों से हजारों श्रद्धालु यहां मनोकामना पूर्ति के लिए बाबा के दरबार में माथा टेकने पहुंचते हैं. धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा वाणेश्वर का गंगाजल और बेलपत्र से अभिषेक करने वाले भक्तों के सभी संकट दूर हो जाते हैं. श्रावण मास और महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यहां का दृश्य अलौकिक होता है, जब पूरा परिसर 'हर-हर महादेव' के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान रहता है.

प्राचीन धार्मिक परंपरा और अद्भुत आध्यात्मिक शांति

देवना स्थित बाबा वाणेश्वर धाम का इतिहास क्षेत्र की समृद्ध सनातन परंपरा से जुड़ा हुआ है:

  • आस्था का अटूट केंद्र: वर्षों पुराने इस पवित्र धाम के गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग के दर्शन मात्र से भक्तों को असीम मानसिक व आध्यात्मिक शांति की अनुभूति होती है.
  • मनोकामना पूर्ति धाम: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बाबा वाणेश्वर को 'मनोकामना लिंग' के रूप में पूजा जाता है. यहां नियमित रूप से रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और विशेष अनुष्ठानों का दौर चलता रहता है.
  • परिसर का कायाकल्प: हाल के वर्षों में स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन द्वारा मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई पर विशेष कार्य किए गए हैं, जिससे धाम की भव्यता में अभूतपूर्व निखार आया है.

महाशिवरात्रि पर कला एवं संस्कृति विभाग का भव्य आयोजन

महाशिवरात्रि और सावन के महीने में बाबा वाणेश्वर धाम में लघु कुंभ जैसा नजारा देखने को मिलता है:

  • कांवरियों का रेला: श्रावण मास के दौरान सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर आने वाले हजारों डाक और पैदल कांवरिया बाबा वाणेश्वर का जलाभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं.
  • कला एवं संस्कृति विभाग का मंच: महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से मंदिर परिसर में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भक्ति संध्या का आयोजन किया जाता है, जिसमें नामचीन कलाकारों की प्रस्तुतियां होती हैं.
  • आकर्षक श्रृंगार व महाआरती: विशेष पर्व-त्योहारों पर देवाधिदेव महादेव का अलौकिक व दिव्य श्रृंगार किया जाता है. शाम की महाआरती में शामिल होने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े रहते हैं.

धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर तेजी से उभरता वाणेश्वर धाम

देवना का यह ऐतिहासिक मंदिर अब केवल स्थानीय आस्था तक सीमित न रहकर बिहार के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना रहा है:

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल: मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं के निरंतर आवागमन से स्थानीय स्तर पर पूजा सामग्री, प्रसाद, फल-फूल और परिवहन से जुड़े छोटे-बड़े व्यापारियों व ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है.
  • मंगल कामना का केंद्र: मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु अपने परिवार के आरोग्य, सुख-शांति और क्षेत्र की समृद्धि के लिए विशेष पूजन करते हैं.


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By Vinay Kumar Mishra

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