सहरसा के चैनपुर की मां काली के दरबार में उमड़ती है आस्था, जहां भक्तों की हर मुराद होती है पूरी

Aaj Ka Darshan: कोसी क्षेत्र का प्रसिद्ध शक्ति पीठ. जहां नवरात्र और अमावस्या पर हजारों श्रद्धालु टेकते हैं माथा, मां काली की कृपा पाने दूर-दूर से पहुंचते हैं भक्त.

सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट

Aaj Ka Darshan: सहरसा जिले के चैनपुर स्थित प्राचीन मां काली मंदिर आज भी लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. शक्ति उपासना, धार्मिक विश्वास और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध यह मंदिर वर्षों से कोसी क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का हिस्सा रहा है. यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां काली के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से मां के दरबार में आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है और मां अपने भक्तों को कभी निराश नहीं लौटातीं.

मंदिर में प्रवेश करते ही महसूस होती है आध्यात्मिक ऊर्जा

चैनपुर का यह प्राचीन मंदिर अपने शांत और भक्तिमय वातावरण के लिए जाना जाता है. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है. सुबह और शाम होने वाली विशेष आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. मां काली की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर भक्त अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं.

वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़ी है मंदिर की पहचान

स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर काफी प्राचीन है और यहां वर्षों से शक्ति साधना की परंपरा चली आ रही है. मां काली की पूजा विशेष विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की जाती है. मंदिर की ख्याति केवल सहरसा ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों तक फैली हुई है. दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु यहां दर्शन कर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

नवरात्र और अमावस्या पर दिखता है भव्य स्वरूप

नवरात्र, काली पूजा और अमावस्या के अवसर पर मंदिर का नजारा देखने लायक होता है. इन विशेष अवसरों पर हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं. सुबह से लेकर देर रात तक भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ और मंत्रोच्चार का क्रम चलता रहता है. मां काली का विशेष श्रृंगार किया जाता है और शाम की महाआरती में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. दीपावली के अवसर पर यहां विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी होता है.

आस्था के साथ पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र

धार्मिक महत्व के साथ-साथ चैनपुर का यह मंदिर स्थानीय पर्यटन के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. हाल के वर्षों में श्रद्धालुओं की सुविधा और परिसर की स्वच्छता को लेकर कई सुधार कार्य किए गए हैं. शाम के समय मंदिर की आकर्षक रोशनी और घंटियों की गूंज पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती है. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि मां काली के दरबार से कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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