डीएम अंकल, गरमी से दिलायें निजात
चिलचिलाती धूप जेठ की दोपहरी का एहसास दिला रही है. ऐसे में दोपहर में नन्हें बच्चों काेे स्कूल से लौटना भारी पड़ रहा है. घर पहुंचने तक उनके चेहरे बेजान हो जाते हैं.
सहरसा नगर : आग बरसाती गरमी ने अभी से ही लोगों काे राह पर चलना मुश्किल कर दिया है. ऐसे वक्त में दोपहर की कड़ी धूप में नन्हें बच्चों का स्कूल से लौटना भारी पड़ रहा है. चिलचिलाती धूप में इन बच्चों के चेहरे मानों ये कह रहे हैं कि डीएम अंकल इस गरमी से निजात दिलाइये. स्कूल के समय में कोई परिवर्तन नहीं होने से इन्हें परेशान होना पड़ रहा है. चैत में पड़ रही भीषण गरमी को महसूस कर लोग इस बात से परेशान हो गये हैं कि जेठ आते-आते क्या हाल होगा.
लोगों ने अभी से ही घरों से निकलना कम कर दिया है. वहीं, इस गरमी में स्कूल जाते बच्चों की दशा देख सभी लोगों को मासूमों पर तरस आ रहा है. बच्चों की मजबूरी है कि इस गरमी के बावजूद उन्हें स्कूल जाना ही है. ऐसे में कई बच्चे बीमार भी पड़ रहे हैं. वहीं, अभिभावकों की मजबूरी भी है, वे स्कूल प्रशासन के फैसले से इतर कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं हैं. अब सभी की निगाहें प्रशासनिक फैसले पर टिकी हैं.
चैत में जेठ की दोपहरी का एहसास
अप्रैल की शुरुआत से ही मौसम जेठ की दोपहरी का एहसास करा रहा है. आमतौर पर अधिकतम तापमान 38 से 41 डिग्री सेल्सियस है. इससे बच्चे हर दिन बीमार पड़ रहे हैं. इस दौरान सबसे अधिक परेशान स्कूली बच्चे ही हैं. नया सत्र प्रारंभ होने के कारण अब स्कूलों में अच्छी उपस्थिति रह रही है.
प्रारंभिक कक्षाओं के सरकारी स्कूलों का वक्त सुबह साढ़े छह बजे से अपराह्न साढ़े 12 बजे तक है. अधिकतर निजी स्कूलों के समय बेतरतीब हैं. अधिकतर ऐसे स्कूल सुबह आठ बजे से अपराह्न एक बजे तक चल रहे हैं. इसके चलते इन बच्चों को दोपहर बाद स्कूल की छुट्टी होने पर घर लौटना पड़ रहा है.
इससे इन बच्चों के अभिभावक चिंतित हैं. इसके बाद भी निजी स्कूलों के मौसम को देखते हुए स्कूल टाइम में कोई परिवर्तन की कोशिश नजर नहीं आ रही है. वहीं, कुछ अभिभावकों को विश्वास है कि जिला प्रशासन इन मासूमों के पक्ष में स्कूल का समय परिवर्तन कर उन्हें राहत देने का काम करेगा.
