चार वर्ष पूर्व सीएम ने मत्स्यगंधा के सौंदर्यीकरण की घोषणा की थी. लेकिन इसे अाज तक कार्य रूप नहीं दिया जा सका है.
सहरसा मुख्यालय : बैजनाथपुर पेपरमिल और बंगाली बाजार ओवरब्रिज के पीछे-पीछे जिले का एकमात्र रमणीक पर्यटक स्थल मत्स्यगंधा भी चल चुका है. अब लोगों ने इसके दिन बहुरने की भी सारी उम्मीदें छोड़ दी है.
अब जब सरकार ने भी मत्स्यगंधा जलाशय के सौंदर्यीकरण के प्रस्ताव को वापस कर दिया है तो वे सरकार की अकर्मण्यता से पहले बीते दस वर्षों के बीच के सभी स्थानीय जनप्रतिनिधियों को हर कदम पर फेल्योर बता रहे हैं. कहते हैं कि रेवड़ी की तरह सांसद व विधायक योजना बांटने वाले ये सफेदपोश नक्शे पर सहरसा के महत्व को उभारने की बजाय लोप करने में लगे रहे.
लालू से लेकर नीतीश तक ने की थी प्रशंसा : साल 1997 में जिले के डीएम टीएन लाल दास के प्रयास से जिले के विकास योजनाओं की 54 लाख रुपये की राशि से बनायी गई मत्स्यगंधा
जलाशय परियोजना का उद्घाटन राज्य सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने किया था. अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने परियोजना पर प्रसन्नता जताते कहा था कि बिहार के सभी जिलों में ऐसी परियोजना विकसित की जायेगी. साल 2012 में तीन दिवसीय सेवा यात्रा के क्रम में सुबह की सैर करने निकले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी प्रशंसा किए बगैर नहीं रह सके. उन्होंने तत्काल इसके सौंदर्यीकरण का प्राक्कलन बनाने का आदेश दिया और घोषणा की. लेकिन इस बात को भी चार साल गुजर गये, झील में कुदाल तक नहीं चल सका है.
मनोरम पर्यटक स्थल था मत्स्यगंधा : निर्माणकाल से अगले तीन वर्षों तक मत्स्यगंधा की खुबसूरती व रमणीयता अपने चरम पर था. यहां दूर-दूर से लोग घुमने आते थे. डेढ़ किलोमीटर लंबी व आधी किलोमीटर चौड़ी झील में हो रही वोटिंग का लुत्फ उठाते थे. झील के चारों ओर बनाए गए परिक्रमा पथ पर टहलने वालों की भीड़ बनी रहती थी. चारों ओर मूल्यवान व छायादार वृक्षों के नीचे बने बेंच पर बैठना लोगों को अच्छा लगता था. पिकनिक स्पॉट के रूप से विकसित हो चुके मत्स्यगंधा में बच्चों की टोली की भीड़ लगी रहती थी. यहां फिल्मों की भी शूटिंग शुरू हो चुकी थी. इस लोकेशन पर कई गीत व नृत्यों को भी फिल्माया जा चुका है. खूबसूरती के कारण ही तत्कालीन सरकार ने झील के किनारे थ्री स्टार होटल कोसी विहार का निर्माण कराया था.
आखिर क्या होगा जिले का? : बड़ी रेल लाईन के उद्घाटन के बाद जिले में दूसरा कोई भी विकास का काम नहीं हो सका है. थोड़ी सी राशि के लिए 40 वर्षों से बैजनाथपुर पेपर मिल चालू नहीं हो सका है. अब तो यहां के नेता उस मिल परिसर में एम्स खोलने की सरकार से मांग तक चुके हैं. नेताओं के जाल में ही 19 वर्षों से बंगाली बाजार में प्रस्तावित, स्वीकृत व तीन-तीन बार शिलान्यास के बाद भी ओवरब्रिज भी फंसा है.
अब इन दोनों परियोजनाओं के पीछे-पीछे मत्स्यगंधा जलाशय भी चल पड़ा है. लगभग 15 वर्षों से मत्स्यगंधा झील भी जीर्णोद्धार की प्रतीक्षा में है. साल 2005 से लेकर 2015 तक के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों ने इसे मुद्दा बनाया. लेकिन जीतने के बाद इसके दिन बहुरने का कोई प्रयास नहीं किया.
