सहरसा : नगरलोकसभा चुनाव व विधानसभा चुनाव के समय बंगाली बाजार में बनाये जानेवाले ओवरब्रिज का मुद्दा विभिन्न रूपों में आम जनमानस के सामने आने लगता है. इन सबों के बीच जनप्रतिनिधि पुल निर्माण में आ रहे गतिरोध को भी गिनाना नहीं भूलते हैं. स्थानीय जनता रोजाना के सड़क जाम से मुक्ति के लिए पुल का निर्माण चाहती है,
जबकि जनप्रतिनिधि अड़चन बता पीछे हट जाते हैं. प्रभात खबर जनता की मुखर आवाज बन समाज के सजग प्रहरी की हैसियत से पुल के मसले को उठाती रही है. प्रभात खबर द्वारा किये जा रहे रायशुमारी में पाठकों की आम राय है कि जनप्रतिनिधि चुनाव से पूर्व व बाद में भी विकास की कसम लें. ताकि पुल निर्माण में आ रहे गतिरोध को दूर कर अवरोधक बनने वाले तत्वों को सामने लाया जा सके.
लोग बताते हैं कि श्रेय लेने की होड़ में जनप्रतिनिधि समस्या के समाधान में रूचि नहीं दिखा रहे हैं. लोगों का मानना है कि विकराल हो चुकी ओवरब्रिज की समस्या के समाधान में जनप्रतिनिधियों को आगे आना चाहिए. जबकि जनप्रतिनिधि क्षेत्र में विकास सामने लाने के बजाय नाम में जोड़ प्रफुल्लित होते रहते हैं.
सड़क जाम से होती है परेशानीसत्तरकटैया के किशन साह बताते है कि बंगाली बाजार ओवरब्रिज के नाम पर सिर्फ वोट लिया गया है, समाधान के वक्त अड़चन बता नेताजी दुबक जाते हैं. महिषी के राजेश झा कहते है कि आंदोलन के नाम पर भी जनप्रतिनिधि पीछे हट जाते हैं, आखिर किन लोगों के दबाव में शिलान्यास का मजाक बनाया जा रहा है.
सहरसा के चौपाल सिन्हा कहते है कि आंदोलन के नाम पर प्रशासन सजग होती है, जबकि समस्या को देखते पुल का निर्माण होना चाहिए.
विक्की यादव कहते है कि बंगाली बाजार में ओवरब्रिज बना नहीं, लेकिन लोग विकास का उपनाम लिये घुम रहे हैं. चैनपुर के अनिल कुमार कहते है कि केंद्र करे या राज्य, ओवरब्रिज के नाम पर जुमले फेंक रही है, सांसद व विधायक का बहिष्कार हो. चंदन, राजकुमार कहते हैं कि चुनाव के समय ओवरब्रिज का वादा व चुनाव बाद अपने मतलब में लग जाते हैं.
नेता नाम से नफरत होने लगी है.सुनिए सरकारप्रभात खबर द्वारा शहर में ओवरब्रिज की मांग को लेकर आप पाठकों के सहयोग से बीते चार वर्षों में कई निर्णायक लड़ाई लड़ी गयी है. जिसका परिणाम है कि अब निर्माण का अड़ंगा समाप्त होने लगा है.
अब जरूरत है हम, आप व राज्य सरकार के सजग होने की. सड़क जाम से जुड़े अनुभव व तस्वीर हमसे साझा करे. फोन व व्हाट्सएप: 94318-07274 मारुफगंज मोड़ के दोपहर बारह बजे की है, जिसे हमारे पाठक सूरज कुमार ने भेजी है.
