सहरसा : सरकार के पॉलीथिन बंदी का असर जिले में नहीं दिख रहा है. नगर परिषद क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका प्रयोग बेखौफ हो रहा है. आम लोग से लेकर व्यापारी वर्ग इसका प्रयोग अब खुलेआम करने लगे हैं. जांच में पूरी सुस्ती के कारण एकबार फिर से रह कारोबार फलने फूलने लगा है.
जांच नहीं होने से व्यापारियों में अब भय नहीं रह गया है. वे खुलेआम इनका प्रयोग करते देखे जा रहे हैं एवं ग्राहक भी बिना किसी भय के इसमें सामान ला एवं ले जा रहे हैं. जबकि बंदी के बाद लगातार जांच से आम लोगों ने प्लास्टिक थैले को छोड़ कपड़े का झोला पकड़ा था. लेकिन एकबार फिर पुरानी स्थिति बनती दिख रही है.
नगर परिषद की सुस्ती के कारण शहरी क्षेत्र में खुलेआम स्वच्छ भारत अभियान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. सभी दुकान व राहगीर बिना किसी डर के प्लास्टिक की पन्नी का उपयोग करने में बाज नहीं आ रहा हैं. शहर के थोक व्यापारी के यहां छापेमारी नहीं पड़ने की वजह से सब्जी मंडी, मिठाई दुकान, मेडिकल स्टोर, किराना दुकान व अन्य जगहों पर पन्नी की खपत देखी जा रही है.
राज्य सरकार ने पूरे राज्य में स्वच्छ भारत अभियान को बढ़ावा देने के लिए प्लास्टिक की पन्नी बेचने व उसका उपयोग करने वाले पर पाबंदी लगायी थी. लेकिन इस नियम का खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है. सरकार के इस बंदी का समर्थन करते हुए प्रभात खबर ने भी लोगों के बीच जागरूकता लाने के लिए जिला मुख्यालय सहित प्रखंडों भी जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने का काम किया था.
स्वच्छता में बड़ा बाधक है पॉलीथिन : प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पॉलीथिन का प्रयोग बाधक बना हुआ है. इस बाधा से मुक्ति के लिए राज्य सरकार ने फरवरी माह में ही पॉलीथिन थैले पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी थी. जिसका फलाफल थोड़े समय के लिए जरूर दिखा. लेकिन जांच की गति सुस्त पड़ते ही एकबार फिर से यह अपना पैर फैलाने लगा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दिल्ली के लालकिला मैदान से पूरे देश में प्लास्टिक की पन्नी को बंद करने का आह्वान किया था. लेकिन जिला प्रशासन की सुस्ती से कारोबार रूकने की जगह बढ़ता ही दिख रहा है. नगर परिषद भी इस ओर से सुस्त रहने के कारण छोटे एवं बड़े कारोबारी पॉलीथिन का प्रयोग धड़ल्ले से कर रहे हैं. इनपर एकबार फिर से शिकंजा कसने की जरूरत है.
