सहरसा : आये दिन शहर में साफ सफाई को लेकर विभाग की उदासीनता साफ तौर पर दिख जाती है. लोगों की सोच से विपरीत कार्य करते हैं सफाई कर्मी. कुछ समय तक नगर परिषद के सफाईकर्मी सभी वार्डों में सफाई के लिए सुबह से ही लगे रहते थे. लेकिन अब अधिकांश वार्डों की सफाई पर विराम लग गया है. काफी दिनों से पड़े कचरे की ढ़ेर को आवारा सुअरों का झुंड दिन भर कुरेदते रहता है.
बच्चों के खेलने का मैदान अब बन गया है कूड़ेदान
सहरसा : आये दिन शहर में साफ सफाई को लेकर विभाग की उदासीनता साफ तौर पर दिख जाती है. लोगों की सोच से विपरीत कार्य करते हैं सफाई कर्मी. कुछ समय तक नगर परिषद के सफाईकर्मी सभी वार्डों में सफाई के लिए सुबह से ही लगे रहते थे. लेकिन अब अधिकांश वार्डों की सफाई पर […]

जिससे कचरे की ढ़ेर से निकलने वाली बदबू से वहां के स्थानीय लोग विभाग व वार्ड पार्षद को कोसने में लगे रहते हैं. अधिकांश वार्डों में छोटे बच्चों के खेलने के मैदान को नगर परिषद के सफाईकर्मी कूड़ेदान बना चुके हैं. जिसके कारण वहां के स्थानीय लोगों के बच्चे चाहरदीवारी में ही खेलने को विवश हैं.
नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 3 के सराही मोड़ के समीप साफ सफाई को लेकर विभागीय कर्मी के कानों पर जू तक नहीं रेंग रही है. कई बार खबर व सूचना के बाद भी विभाग सफाई को लेकर सजग नहीं हुई है.
जबकि वर्तमान में वार्ड नंबर 3 में कोई वार्ड पार्षद नहीं है. कुछ महीने पहले ही वार्ड 3 की वार्ड पार्षद का देहांत हो गया था. लेकिन जब तक वार्ड पार्षद जीवित थी तब तक स्थानीय लोगों को सफाई को लेकर कोई खास असुविधा नहीं हुई थी.
लेकिन उनकी मृत्य के बाद कचरा उठाव को लेकर विभाग उदासीन बना बैठा है. जब कभी भी सफाईकर्मी द्वारा सफाई की जाती है तो वह छोटे छोटे कचरों की ढ़ेर को बच्चों के खेलने वाली मैदान में गिरा दिया जाता है. जिससे उसके आस पास का माहौल दूषित हो जाता है.
काफी समय से पड़े कचरे से दुर्गंध निकलकर हवाओं में फैल जाता है. जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. जिसके कारण वहां के स्थानीय लोग अपने बच्चों को मैदान में खेलने का विरोध करने लगे हैं. क्योंकि विभाग द्वारा की जा रही लापरवाही से छोटे बच्चों की खुशी पर ग्रहण लग चुका है.