रेलवे के बुकिंग काउंटर पर तैनात आरपीएफ के जवान भी संदिग्ध
दलालों के टिकट से करें तोबा, जांच में होगी परेशानी
सहरसा : सहरसा में रेलवे के तत्काल टिकटों की कालाबाजारी का मामला फूटने के बाद अब रेलवे की मॉनीटरिंग व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गयी है. खासकर टिकट बेचने के लिए जारी पर्सनल यूजर आइडी की जांच को लेकर. सहरसा में टिकट दलालों ने यूजर आइडी का इस्तेमाल कर और कई फेक आइडी बना टिकट बुकिंग धड़ल्ले से कर रहे हैं. इसी आइडी से प्रीमियम व तत्काल के टिकट बुक करवा कर उसकी कालाबाजारी की जाती है. आरपीएफ इस प्रकार के गोरखधंधे पर नकेल कसने में नाकामयाब साबित हुई है. दलाल टिकट बुक कराने में किस तरह से यूजर आइडी का गलत इस्तेमाल करते हैं,
इसका खुलासा जांच में ही हो सकेगा. हालांकि रेलवे ने शहर में दर्जनों लोगों के नाम पर यूजर आइडी जारी कर रखी है. संभवतः इसी का गलत इस्तेमाल कर टिकटों की कालाबाजारी की जा रही है. सॉफ्टवेयर से बनाये जाने वाले तत्काल टिकट में फोन नंबर भी दलाल व उनके सहयोगियों की ही होती है.
स्टेशन पर दलालों की सक्रियता: स्टेशन पर तत्काल टिकट को लेकर बढ़ी सख्ती और तरह-तरह के कानून बनने के बाद तत्काल टिकट दलालों ने अपना रुख छोटे स्टेशनों की तरफ भी किया है. जिले के सिमरी बख्तियारपुर में भी दलाल सक्रिय हो गये हैं. पैसे के बल पर कंफर्म टिकट कटने के कारण गिरोह के सिंडिकेट की नजर छोटे स्टेशनों पर भी लगी हुई है. जहां बेखौफ होकर गिरोह के सदस्य छोटे स्टेशनों पर टिकट कटा रहे हैं. यहां से कटी हुई टिकटें मुख्यालय स्थित दलालों के पास पहुंचा दी जाती है. एक टिकट पर मोटी रकम वसूल की जाती है. इतना ही नहीं एजेंट दूसरे प्रदेश से आने वाले लोगों के घर तक का टिकट पहुंचाने का खेल करते हैं. स्टेशन के बुकिंग काउंटर पर कोई रेलवे सुरक्षा बल के पदाधिकारी नहीं होते हैं. यहां सिर्फ जवान तैनात रहते हैं. जिसका फायदा सिंडिकेट के सदस्य उठाते हैं. आरक्षण काउंटर कर्मियों से भी इनकी खूब सेटिंग होती है.
तत्काल टिकट वाले आइडी की होगी सघन जांच
होली के बाद पुरबिया एक्सप्रेस व गरीब रथ से लौटने वाले तत्काल टिकट यात्रियों के टिकट की सघन जांच की जायेगी. पर्व त्योहार का सीजन समाप्त होने के बाद लोग फिर से लोग रोजी रोटी की तलाश में परदेस की ओर जाने लगेंगे. लेकिन, कमाने के लिए परदेस जाने वाले लोगों की यात्रा में आरक्षित टिकट पुन: सबसे बड़ा बाधक बनेगा. कंफर्म टिकट नहीं मिलने के कारण लोग तत्काल टिकट लेने की जुगत लगाने लगते है. आरक्षण काउंटर पर रात भर लाइन में खड़ा होने के बाद भी टिकटें नहीं मिल पाती है. ऐसे में लोग दलालों की शरण में पहुंच जाते हैं. दलालों से ली गयी टिकट यात्रियों के परेशानी का कारण बन जायेगी.
फोन पर नाम और अकाउंट में पैसा
जबसे तत्काल टिकट के लिए आइडी देने का नियम बदल गया है, तब से दलालों की पौ बारह हो गयी है. आइडी की झंझट से मुक्त होने के बाद दलाल अब आराम से फोन पर भी सब कुछ डील कर लेते हैं. फोन पर सफर करने वाले यात्रियों का नाम और अकाउंट में पैसा मंगवाया जाता है. तत्काल टिकट कटाने के लिए दलाल पंद्रह घंटे पहले ही सेटिंग-गेटिंग का काम पूरा कर लेते हैं.
फर्जी आइडी बनाने का चल रहा खेल
तत्काल टिकट गिरोह के सदस्य तत्काल की कंफर्म टिकटें से लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों के नाम से पहचान पत्र बनाने का भी जिम्मेदारी लेते हैं. लेकिन इसका शुल्क अलग से भुगतान करना पड़ता है. पैसे देकर डुप्लीकेट पेन कॉर्ड से लेकर वोटर कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस तक बनाने का काम लिया जाता है.
