मौके पर पहुंचे डीएम एसपी व एसडीपीओ को करनी पड़ी मशक्कत
अफरातफरी के माहौल में इंटर प्रायोगिक परीक्षा प्रारंभ
एसएनएस में गुरुवार की परीक्षा हुई स्थगित
सहरसा : इंटरमीडिएट प्रायोगिक परीक्षा गुरुवार को अफरा-तफरी के माहौल में जिला मुख्यालय के सात केंद्रों पर शुरू की गयी. वहीं शहर के सर्वनारायण सिंह राम कुमार सिंह महाविद्यालय में परीक्षा देने पहुंचे छात्रों के हंगामे के बाद गुरुवार को होने वाली परीक्षा स्थगित कर दी गयी. ज्ञात हो कि एसएनएस कॉलेज केंद्र पर महाविद्यालय प्रशासन द्वारा परीक्षा की पूरी तैयारी भी नहीं की गयी थी. जिसके बाद आक्रोशित छात्र हंगामा करने लगे. कॉलेज परिसर में अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न हो गया. छात्रों की भीड़ में अभिभावक भी शामिल थे. इस दौरान छात्रों की आपसी झड़प में कुछ परीक्षार्थी जख्मी भी हो गये. डीएम की मौजूदगी में हंगामे का केंद्र बना एसएनएस कॉलेज में पहले दिन की परीक्षा स्थगित करने की घोषणा के बाद आक्रोशित छात्र शांत हुए.
जिलाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल लगभग एक घंटे तक एसएनएस कॉलेज परीक्षा केंद्र पर शांति व्यवस्था बनाने में लगे रहे. छात्रों की शिकायतों को ध्यान में रखकर जिलाधिकारी ने नये सिरे से छात्रों की सुविधा को देखते हुए रूटीन चिपकाने का निर्देश दिया. हालांकि प्रधानाचार्य डॉ के एस ओझा ने बताया कि इंटरमीडिएट परीक्षा में दंडाधिकारी तो नियुक्त किया गया था, लेकिन पुलिस बल की तैनाती नहीं होने के कारण भारी भीड़ को नियंत्रित करने में कठिनाई हुई. इसके बावजूद केंद्राधीक्षक, पर्यवेक्षक एवं वीक्षकों ने कदाचरमुक्त परीक्षा का संचालन सुनिश्चित किया. आगे कदाचारमुक्त परीक्षा के लिए और भी बेहतर इंतजाम किये जायेंगे.
सभी केंद्रों पर पर परेशान रहे परीक्षार्थी : जिला मुख्यालय के सभी केंद्रों पर शुरुआत के समय काफी अफरा-तफरी का माहौल रहा. जिला प्रशासन द्वारा प्रतिनियुक्त अधिकारियों के लेट से पहुंचने के कारण छात्रों में आक्रोश भी देखा गया. जिला प्रशासन द्वारा प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी व पुलिस बलों के पहुंचने के बाद एसएन कॉलेज छोड़ जिला मुख्यालय के छह केंद्रों पर परीक्षा संचालित हो सकी.
बोर्ड की गलती से बढ़ी परेशानी : जिले के 22 हजार छात्र छात्राओं के लिए मात्र नौ केंद्र बनाये जाने से अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हुई है. वहीं आरएम कॉलेज केंद्र पर 10 हजार तक छात्रों की परीक्षा संचालन करने की जिम्मेदारी सौंप दी गयी. ऐसे में छात्रों एवं अभिभावकों को पहुंचने से केंद्रों पर बड़ा मजमा लग गया. अफरातफरी का माहौल देख केंद्राधीक्षक भी सकते में आ गये.
जानकारी के अभाव में पहुंचे छात्र: प्रायोगिक परीक्षा की तिथि बोर्ड द्वारा निर्धारित कर दिये जाने के बाद कॉलेज को उनके सुविधानुसार संचालन की जिम्मेदारी दे दी गयी. परीक्षा केंद्रों ने इसे बांट कर लिस्ट परीक्षा के समय महाविद्यालय में चिपका कर अपनी जिम्मेदारी समाप्त कर ली. लेकिन दूरदराज के छात्रों को इसकी जानकारी नहीं होने से वे भी तैयार होकर परीक्षा देने पहुंच गये. जिससे स्थिति अराजक हो गयी. जानकारी होने के बाद बहुत परीक्षार्थी वापस लौट गये.
जिस कॉलेज के छात्र वहीं से आये वीक्षक : प्रायोगिक परीक्षा के लिए जिन कॉलेज के छात्र छात्राओं की परीक्षा ली जानी है उन्हीं कॉलेजों से प्रायोगिक परीक्षा के वीक्षकों को बुलाया गया है. ऐसे में दूसरे केंद्र पर परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लोगों के समझ से परे था. आखिर बोर्ड की क्या मनसा है. कदाचार रोकना तो दूर की बात है. सिर्फ परेशानी ही नजर आ रही थी. निकट समय में बोर्ड द्वारा परीक्षा भी ली जानी है. पेपर की तैयारी की जगह बच्चे परेशान हो रहे हैं. इस परेशानी से उनके आगे की तैयारी भी प्रभावित हो सकती है.
केंद्राधीक्षक भी हैं परेशान: केंद्राधीक्षकों ने बताया कि प्रायोगिक परीक्षा के लिए केंद्र बनाये गये विद्यालय एवं महाविद्यालय में जितनी क्षमता है उससे दस गुणा अधिक बच्चों की परीक्षा लेना काफी कठिन ही नहीं दुरूह कार्य है. खासकर उन विषयों की प्रायोगिक परीक्षा लेना जिन विषयों की ना तो पढ़ाई होती है ना हीं शिक्षक व प्रयोगशाला ही है. ऐसे में खानापूर्ति के सिवाय हो ही क्या सकता है.
प्रायोगिक परीक्षा की पूर्व से नहीं थी तैयारी
बोर्ड द्वारा प्रायोगिक परीक्षा के लिए केंद्र बना दिये गये एवं केंद्रों पर परीक्षार्थियों की सूची भेज दी गयी. लेकिन परीक्षा किस तरह संचालित हो, इसकी व्यवस्था नहीं की गयी थी. प्रत्येक सत्र में 4 सौ से अधिक परीक्षार्थियों को शामिल किया गया. जिससे अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न होना लाजिमी था. केंद्रों के बाहर अभिभावकों एवं दूसरे सत्र के परीक्षार्थियों की भीड़ लगी रही. पुलिस बल को इस भीड़ को हटाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी.
मौखिक परीक्षा नहीं हुई
प्रायोगिक परीक्षा के तहत परीक्षार्थियों की मौखिक परीक्षा भी होनी थी. लेकिन प्रत्येक केंद्र पर अराजक व्यवस्था उत्पन्न होने की वजह से मौखिक परीक्षा नहीं ली गयी. इस नाम पर सभी केंद्र पर खानापूर्ति की गयी. जबकि बोर्ड की बैठक में प्रायोगिक परीक्षा बेहतर ढंग से लेने का दावा किया गया था. कई छात्रों ने बताया कि जब कॉलेज में प्रायोगिक कक्षा ही नहीं होती है तो ऐसे में इस परीक्षा का कोई औचित्य ही नहीं है.
आरएम कॉलेज में दस हजार परीक्षार्थी
जिला मुख्यालय में बनाये गये इंटर के सात प्रायोगिक परीक्षा केंद्रों में आर एम कॉलेज में सबसे अधिक छात्रों की परीक्षा ली जा रही है. आर एम कॉलेज में 10 हजार, रमेश झा महिला कॉलेज में आठ हजार 8 सौ 82, जिला स्कूल में 13 सौ 74, अनुग्रह नारायण सिंह स्मारक केंद्र पर 18 सौ एवं राजकीय कन्या उच्च विद्यालय केंद्र पर लगभग 15 सौ बच्चों की प्रायोगिक परीक्षा ली जा रही है. वहीं एमएलटी कॉलेज में पांच हजार परीक्षार्थी परीक्षा देंगे. 11 जनवरी से 15 जनवरी तक भौतिक विज्ञान, गृह विज्ञान एवं भूगोल, 16 से 21 जनवरी तक रसायन विज्ञान, संगीत, साइकोलॉजी, एवं 22 से 24 जनवरी तक बायोलॉजी, ईपीएस व 25 जनवरी को कॉमर्स की परीक्षा ली जायेगी.
