आलू की लतर व सरसों झुलसे

ठंड से फसल पर पड़ रहा प्रभाव पाला लगी फसल में फंगीसाइड का प्रयोग कर बचा सकते हैं पौधे सहरसा : लगातार हो रही कड़ाके की ठंड से सोमवार को धूप खिलने से आम लोगों को जहां थोड़ी राहत मिली है. वहीं किसानों को थोड़ी बहुत आर्थिक क्षति का सामना भी करना पड़ रहा है. […]

ठंड से फसल पर पड़ रहा प्रभाव

पाला लगी फसल में फंगीसाइड का प्रयोग कर बचा सकते हैं पौधे
सहरसा : लगातार हो रही कड़ाके की ठंड से सोमवार को धूप खिलने से आम लोगों को जहां थोड़ी राहत मिली है. वहीं किसानों को थोड़ी बहुत आर्थिक क्षति का सामना भी करना पड़ रहा है. खासकर आलू की फसल को लगातार कड़ाके की ठंड के कारण काफी नुकसान पहुंचा है. आलू की फसल में पाला लगने से समय से पूर्व ही पौधे सूखने लगे हैं. इस सूखती फसल को देख किसानों में मायूसी छा गयी है. वहीं गेहूं की फसल को बढ़ते ठंड से काफी लाभ पहुंचा है. जबकि मक्का, चना, मसूर एवं सरसों की फसल को क्षति पहुंची है.
पछुआ हवा से बढ़ी परेशानी: लगातार कड़ाके की ठंड के बाद मंगलवार को धूप खिलने से आम लोगों को थोड़ी राहत मिली है. लेकिन पछुआ हवा के कारण ठंड़ में कमी नहीं हो पायी है. गरीबों की हालात जस की तस बनी हुई है. सरकारी मदद नहीं मिलने से गरीबों के सामने कठिनाई देखी जा रही है. जिला प्रशासन की ओर से अलाव व कंबल वितरण का कार्य तो किया गया जो नाकाफी था.
गरीब परिवार इससे वंचित ही रहे.
खिली धूप से मिली राहत: रविवार को दोपहर बाद थोड़ी देर के लिए खिली धुप से आम जनजीवन ने राहत की सांस ली है. लगातार हो रहे ठंड से आम जनजीवन ठहर गया था. जिसमें धूप खिलने से सुगबुगाहट होने लगी है. लोग घरों से निकलने लगे. बाजारों में भी थोड़ी रौनक आ गयी है. लेकिन पछुआ हवा के बढ़ने से ठंड में कमी नहीं हो पायी है. इस ठंड से खास कर बूढ़े व बच्चों को अधिक परेशानी हो रही है.
पाला लगी फसल में फंगीसाइड का करें प्रयोग : अत्यधिक ठंड होने से आलू, मक्का, चना, मसूर व सरसों की फसल को क्षति पहुंची है. जबकि गेहूं की फसल को लाभ पहुंचा है. इस बाबत कृषि विज्ञान केंद्र अगवानपुर के प्रधानाचार्य डॉ उमेश कुमार सिंह ने बताया कि पाला गिरने से गेहूं की फसल को लाभ पहुंचा है. उन्होंने बताया कि जितनी ठंड बढ़ेगी.
गेहूं की पैदावार उतनी अच्छी होगी. वहीं उन्होंने कहा कि पाले से मक्के, चना एवं मसूर की खेती को थोड़ी बहुत हानि हुई है. पाले के कारण पौधे की वृद्धि थोड़ा कम हुई है. उन्होंने कहा कि सरसों की फसल को पाले से थोड़ी अधिक क्षति हुई है. इसके लिए किसानों को इन खेतों में फंगीसाइड का प्रयोग कर इसकी रोकथाम कर सकते हैं. मक्का, मसूर, आलू आदि का पत्ता अगर पीला हो गया है तो एनपीके 1919 पांच ग्राम प्रति लीटर पानी में डाल कर छिड़काव किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि कृषकों को कृषि के किसी भी परामर्श के लिए कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से सलाह लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कृषकों को दुकानदारों की सलाह से हमेशा बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि उर्वरक दुकानदार अपनी दवाई व अन्य सामग्रियों को बेचने के लिए जानकारी के अभाव में उल्टी-सीधी दवाई दे डालते हैं. इससे फसलों को हानि पहुंचती है. उन्होंने कहा कि पंचायत अर्थशास्त्र से लेकर जिला स्तर तक किसी विभाग के कर्मी कार्यरत हैं उनसे सलाह ली जा सकती है.
इससे आगे किसी विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से भी फसल आधारित सलाह मुफ्त में ली जा सकती है. उन्होंने कहा कि विभाग के वैज्ञानिक किसानों की हर मदद के लिए हमेशा तत्पर हैं एवं फसल के अनुसार अच्छी पैदावार की सलाह के लिए हमेशा मौजूद हैं. उन्होंने बताया कि आलू की पैदावार में नुकसान हुआ है. इसके बचाव के लिए कृषि अधिकारियों से एवं वैज्ञानिकों से सलाह लेकर और नुकसान होने से रोका जा सकता है.
गेहूं से बंधी है किसानों की आस
किसान सत्तरकटैया के सहरबा गांव निवासी राजेंद्र यादव बताते हैं कि ठंड़ से थोड़ी परेशानी जरूर होती है. लेकिन किसानों के फसल को कोई खास हानि नहीं है. इस भीषण ठंड से गेहूं की फसल को लाभ मिल रहा है. लेकिन मक्का, मसूर, आलू, गोभी आदि फसल में ठंड का थोड़ा असर देखा जा रहा है. इन फसलों के पत्ते पीले पड़ रहे हैं. आलू में पाला के कारण झुलसा रोग पकड़ लेता है. ठंड की वजह से हम जैसे किसानों को फसल की पटवन करने में परेशानी होती है.
इस समय अगता गेहूं में दूसरा तथा पछता में पहला पटवन चल रहा. जिसमें किसान पटवन के बाद यूरिया दो किलो, पोटास हाफ किलो, जाईम तथा डीएपी एक किलो प्रति कट्ठा खाद डालते हैं. इसके अलावा नहर में पानी नहीं होने के कारण किसान को पंपसेट से पटवन करना पड़ता है. जिसमें अधिक पैसा खर्च होता है.

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