सहरसा : केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में लाया गया नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल चिकित्सा क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लायेगा. उक्त बातें मंगलवार को पीके नर्सिंग होम में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते अस्पताल के निदेशक डॉ पीके सिंह ने कही. उन्होंने कहा कि इससे मेडिकल क्षेत्र का विस्तार होगा. कॉलेज की स्थापना व वार्षिक मूल्यांकन में भी सुधार होगा. विश्व मानक के अनुसार मरीज व चिकित्सकों का अनुपात होगा. मेडिकल काउंसिल पूरी तरह भ्रष्ट व मनमाने तरीके से कार्य करता था. जिसका परिणाम है कि सौ से ज्यादा कॉलेज समस्या से घिरी हुई है. न्यायालय में केस का बोझ बढ़ गया है.
एमसीआइ का कार्यकलाप कागज पर होता था रिमोट कंट्रोल कहीं और से होता था. नये बिल से मेडिकल कॉलेज में स्थापना के समय व पांचवीं वर्ष की परीक्षा के बाद जांच की बात कही गयी है. इसके बाद एमएबीबीएस की संयुक्त परीक्षा होगी, जो स्वागत योग्य है. समय-समय पर मूल्यांकन कर कॉलेज का रेटिंग होगा. यह सरकार का सकारात्मक कदम है.
आइएमए का विरोध गलत है. किसी बिल का सकारात्मक पहलू देखना चाहिए. किसी भी नयी चीज में कुछ दिक्कतें होती हैं. जिसे समय-समय पर संशोधन कर दुरुस्त कर लिया जायेगा. उन्होंने सरकार से पूरे देश में एक कार्यक्रम चलाने की मांग की. फीस व जांच दर एक होनी चाहिए. जब पूरे देश में सारा व्यापार दस से चालीस प्रतिशत पर होता है तो फिर डॉक्टरों को सौ प्रतिशत से ज्यादा क्यों चाहिए. एक एक्सरे में बीस रुपये खर्च होते हैं और मरीज से छह सौ से सात सौ गुणा ज्यादा शुल्क वसूला जाता है. इस पर नजर रखने की आवश्यकता है.
