अस्पताल में गद्दे पर डॉक्टर, पुआल पर मरीज

शर्मनाक. दर्द व ठंड से अस्पतालों में कराहते रहे मरीज, स्वास्थकर्मियों को आती रही नींद समय : रात 12 बजकर 40 मिनट स्थान : अनुमंडलीय अस्पताल मरीज को आवारा कुत्तों से बचाने के लिए पहरेदारी कर थे परिजन सिमरी (सहरसा) : बिहार सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के बेहतर होने के लाख दावे कर ले, लेकिन जमीनी […]

शर्मनाक. दर्द व ठंड से अस्पतालों में कराहते रहे मरीज, स्वास्थकर्मियों को आती रही नींद

समय : रात 12 बजकर 40 मिनट
स्थान : अनुमंडलीय अस्पताल
मरीज को आवारा कुत्तों से बचाने के लिए पहरेदारी कर थे परिजन
सिमरी (सहरसा) : बिहार सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के बेहतर होने के लाख दावे कर ले, लेकिन जमीनी हकीकत वादों से कोसों दूर है. ताजा मामला सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडलीय अस्पताल का है. प्रभात खबर की टीम सोमवार देर रात्रि जब अनुमंडलीय अस्पताल पहुंची तो अस्पताल में डॉक्टर से लेकर नर्स तक मरीजों की चिंता से मुक्त खर्राटे भरते नजर आये. वहीं मरीजों का हाल सबसे बुरा दिखा. लगभग तीन दर्जन इलाजरत मरीज इस कंपकंपाती ठंड में पुआल पर खुले में रात गुजारते दिखे. दर्द और ठंड से परेशान यह मरीज जैसे-तैसे रात गुजार रहे थे. वहीं मरीज के परिजन जग कर मरीज को आवारा कुत्तों से बचाने के लिए पहरेदारी करते नजर आये.
होश आते ही होने लगती है उल्टी..
साहब, करोड़ों की जनसंख्या वाले देश में हम गरीबों की स्थिति चींटी समान है. कुछ चींटी मर भी गयी तो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. यह बातें सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडलीय अस्पताल में इलाजरत सिटानाबाद निवासी किरण देवी के परिजनों ने कही. परिजनों ने बताया कि देर शाम ऑपरेशन हुआ और भेड़-बकरियों की तरह मरीज को उठाकर खुले बरामदे में सुला दिया गया. अब रात के साढ़े बारह बज रहे हैं. मरीज की ठंड से जान जा रही है और जैसे ही होश आता है मरीज को उलटी होने लगती है.
परिजनों ने बताया कि कोई नहीं देखने वाला है, डॉक्टर से लेकर नर्स तक गायब हैं. सोमवार देर रात्रि सिमरी बख्तियारपुर अनुमडंल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में परिवार नियोजन के हो रहे ऑपरेशन में बदइंतजामी का माहौल हैरान कर देने वाला था. अस्पताल में ऑपरेशन कराने के बाद ढाई दर्जन मरीजों को हांड़ कंपाने वाली ठंड के बीच बेड पर सुलाने के बजाय अस्पताल की जमीन पर खुले में पुआल पर ही सोना पड़ रहा था. अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही से ठंड लगने और संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ था. लेकिन डॉक्टरों के टारगेट पूरा करने की जद्दोजहद में मरीजों की स्थिति जानवरों से भी बदतर दिखी.
ऐसा ही हाल रामपुर से आयी खुशबु देवी के परिजनों ने भी बताया. खुशबु देवी के परिजनों ने बताया कि मरीज ऑपरेशन के बाद से परेशान है, देखने वाला कोई नहीं. वहीं कई मरीज अस्पताल के खुले बरामदे में ऑपरेशन के दर्द और ठंड दोनों से परेशान दिखे. बनमा से आयी मरीज पिंकी कुमारी, भोरहा से कंचन देवी, भोरहा की ही फूलन देवी आदि के परिजनों ने बताया कि सर जी, बहुत परेशान हैं. उन्होंने कहा कि सुबह तक मेरा मरीज बच जाये. इस ठंड में बिना व्यवस्था के ऑपरेशन करना सरकार की सबसे बड़ी लापरवाही है.
अनुमंडलीय अस्पताल में सुरक्षाकर्मी भी थे नदारद
सिमरी बख्तियारपुर, सलखुआ और बनमा इटहरी प्रखंड की लाखों की आबादी के लिए सरकारी चिकित्सा सुविधा का एकमात्र सबसे बड़ा केंद्र अनुमंडलीय अस्पताल में देर रात्रि कई खामियां दिखी. जिनमें सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षाकर्मी का ना होना था. मरीज के परिजनों ने बताया कि इतने बड़े अस्पताल में सुरक्षाकर्मी नदारद हैं जो चिंता का विषय है. इसके अलावे अस्पताल के बेड पर चादर भी नहीं दिखा. जिस वजह से बिना चादर के ही मरीज बेड पर लेटे दिखे. वहीं कई मरीज के परिजनों ने बताया कि डॉक्टर द्वारा कई ऐसी दवा लिख दी जाती है जो अस्पताल में उपलब्ध ही नहीं रहती और जिस कारण हम गरीबों को काफी परेशानी होती है.
यहां यह बता दें कि अनुमंडल अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रतिनियुक्त स्वास्थकर्मी व कुछ नये कर्मी के सहारे चलाया जा रहा है. वहीं गंभीर रोगों के इलाज की यहां कोई व्यवस्था नहीं है. चिकित्सा के अभाव में गंभीर रूप से बीमार मरीज असमय काल के गाल में समा जाते हैं और मामूली रूप से बीमार मरीज को सहरसा सदर अस्पताल रेफर कर दिया जाता है. इसके कारण अनुमंडल के सिमरी बख्तियारपुर,
सलखुआ व बनमा ईटहरी प्रखंड के लाखों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए सहरसा या फिर पटना की शरण लेनी पड़ रही है. ज्ञात हो कि सरकार ने राज्य के 47 अनुमंडल में वित्तीय वर्ष 2009-10 में 100 शैय्या वाले अनुमंडल अस्पताल बनाने की घोषणा की थी और इसी कड़ी में कोसी क्षेत्र के लाखों लोगों की स्वास्थ्य सुविधा के लिए यहां भी 100 शैय्या वाले अनुमंडलीय अस्पताल बनाने की नींव पड़ी.
अनुमंडलीय अस्पताल का विशाल भवन 4 करोड़ 91 लाख रुपये की लागत से बन कर तैयार हो गया है. आज से लगभग दो वर्ष पूर्व 26 मई 2015 को अनुमंडल अस्पताल का बोर्ड भी लगा दिया गया, लेकिन अनुमंडलीय अस्पताल वाली सुविधा आज तक बहाल नहीं की गयी.
डॉक्टर साहब सो रहे थे..
सोमवार देर रात्रि प्रभात खबर की टीम जब अनुमंडलीय अस्पताल पहुंची तो मरीजों की बदतर स्थिति देख टीम ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर से मिलने की कोशिश की. डॉक्टर अपनी केबिन से नदारद दिखे. रात लगभग एक बजे के करीब जब प्रभात खबर की टीम डॉक्टर के केबिन में गयी. डॉक्टर ड्यूटी पर तैनात नहीं थे और नर्स व एएनएम आराम से कंबल तान केबिन में ही सोयी नजर आयी. कैमरे की फ्लैश चमकते ही सभी उठ कर बैठ गयी.
इधर डॉक्टर की खोज जारी थी कि एक मरीज के परिजन ने ग्राउंड फ्लोर पर स्थित चिकित्सक विश्राम कक्ष की ओर इशारा करते हुए बताया कि दो घंटे पहले ही डॉक्टर साहब सोने चले गये. प्रभात खबर की टीम जब अस्पताल से निकलने लगी तो बरामदे पर एक महिला मरीज कराहती नजर आयी. कराह रही महिला के परिजनों ने बताया कि डिलेवरी पेशेंट है, एक रूम है वह भी फूल है. जिस वजह से बरामदे पर जैसे-तैसे रात काट रहे हैं. परिजनों ने बताया कि मरीज ठंड और डिलेवरी पेन से परेशान है. लेकिन अस्पताल के प्रभारी से लेकर डॉक्टर मिल नहीं रहे.
डाॅक्टरों व कर्मियों की कमी से जूझ रहा अस्पताल
सौ शैय्या वाले अनुमंडल अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग से 108 चिकित्सा कर्मी के स्वीकृत पद की अनुशंसा की गयी है. इसके विरुद्व कुछेक डॉक्टर और नर्स को स्वास्थ्य विभाग ने पदस्थापित कर अपना पल्ला झाड़ लिया है. इसके कारण मरीजों को काफी परेशानी होती है और यह भी सत्य है कि सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडलीय अस्पताल में जो भी मरीज के परिजन रोगी लेकर आते हैं वह यह समझ कर आते हैं कि चलो पुर्जा कटाने के बाद रेफर करा कर अन्य जगह इलाज के लिए चले जायेंगे. क्योकि बीते वर्षो में इस अस्पताल ने रेफरल अस्पताल के रूप में प्रसिद्धि पा ली है और यहां इलाज के नाम पर फर्स्ट ऐड कर सहरसा रेफर कर दिया जाता है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >