जरा शहर की सड़कों पर भी चल लीजियेगा मुख्यमंत्री महोदय

सीएम का फरमान भी सड़कों की मरम्मत के काम को नहीं चढ़ा सका परवान सहरसा : सीएम नीतीश कुमार की ओर से सरकार बनने के बाद जारी डेडलाइन क्रॉस होने के बावजूद शहर की सड़कों को अभी तक भी ठीक नहीं करवाया जा सका है. आलम यह है कि यहां आने-जाने वालों को समझ नहीं […]

सीएम का फरमान भी सड़कों की मरम्मत के काम को नहीं चढ़ा सका परवान
सहरसा : सीएम नीतीश कुमार की ओर से सरकार बनने के बाद जारी डेडलाइन क्रॉस होने के बावजूद शहर की सड़कों को अभी तक भी ठीक नहीं करवाया जा सका है. आलम यह है कि यहां आने-जाने वालों को समझ नहीं आ रहा कि सड़क में गड्ढा है या गड्ढे में सड़क है. बड़ी बात यह है इन कई इंच बड़े गड्ढे में पैचिंग वर्क तो दूर कुछ इलाकों में अभी तक गड्ढे की ठीक से भराई भी नहीं हो पायी है. बारिश के मौसम में राहगीरों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है. सरकार में शामिल प्रतिनिधियों की सक्रियता सड़क निर्माण को लेकर नहीं देखी गयी.
राज्य में सरकार जरूर बदली, लेकिन जिले को मंत्रीमंडल में जगह मिलती रही. पहली सरकार में राजद कोटे से डॉ अब्दुल गफूर कैबिनेट मंत्री थे. 16 महीने बाद गठबंधन टूटने पर उन्हें हटना पड़ा. उनके बाद जदयू कोटे से दिनेश चंद्र यादव मंत्री बने हैं. इनका भी ध्यान सड़क की जर्जर स्थिति पर नहीं है. फिलवक्त सीएम नीतीश कुमार यात्रा पर आने वाले हैं. लोगों का कहना है कि सीएम को शहर की इन सड़कों पर कुछ दूर पैदल भी चलना चाहिए. उन्हें जनता के दर्द का एहसास हो जायेगा. लोगों ने बताया कि सांसद, विधायक क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं से कन्नी काट रहे हैं.
यह है सड़क का हाल
शहर की मुख्य सड़कों की दशा दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है. सहरसा बस्ती से समदा जाने वाली सड़क का सबसे बुरा हाल है. कई जगह सड़क टूटी हुई है तो कहीं सड़क है ही नहीं. बारिश के मौसम में मुख्य सड़कें तालाब बन जाती है. वॉर्डों में तो हालत यह है कि यहां लोगों के घरों तक में पानी भर जाता है. टूटी- फूटी सड़क होने से आने-जाने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा स्टेशन रोड, पंचवटी, सराही रोड, स्टेशन रोड, विद्यापति नगर रोड की हालत राहगीरों के दम निकालने के लिए काफी है.
राहगीरों को आवागमन में होती है परेशानी
सड़क जर्जर होने की वजह से राहगीर को आवागमन में काफी परेशानी होती है. खासकर बच्चे रोजाना चोटिल हो जाते हैं. स्थानीय लोगों द्वारा सड़क निर्माण को लेकर कई बार आंदोलन किये जाने के बावजूद सरकार व जनप्रतिनिधियों की कोई पहल सामने नहीं आयी है. स्थानीय शहरी इलाके की कमोबेश सभी सड़कें बदहाल बनी हुई है.
सड़क से उखड़ने लगे हैं पत्थर
शहरी मुख्यालय को सिमरी बख्तियारपुर से जोड़ने वाली मुख्य सड़क चांदनी चौक से सुलिंदाबाद तक जर्जर बनी हुई है. सड़क के पत्थर अब उखड़ने लगे हैं. सड़कों पर पत्थर रहने के कारण वाहन भी दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं. लोगों को बारिश के दिनों में काफी परेशानी होती है.
समस्या
सड़कें बनती ही नहीं हैं अगर बन भी जाती हैं तो कुछ दिनों में ही उखड़ने लगती है.
टूटी सड़कों पर चलने में काफी दिक्कत होती है.
अलकतरा वाली सड़क कुछ ही दिनों में उखड़ने लगती है.
बारिश में सड़कों पर पानी भर जाता है.

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