दुर्घटना. बस की ठोकर से छात्र जख्मी, आक्रोशितों ने बस को किया आग के हवाले
पॉलिटेक्निक ढाला के समीप गुरुवार सुबह कोचिंग से लौट रहे इंटर के छात्र को सामने से बस ने ठोकर मार दी. छात्र के जख्मी होने पर लोगों ने बस में तोड़फोड़ की. उसे फूंक डाला. जख्मी छात्र सुपौल जिले के बलुआ बाजार ओपी क्षेत्र के चांपी निवासी कदमलाल राय का पुत्र मुकेश राय है. उसे सिर व छाती में गंभीर चोट लगी है.
सहरसा : बस स्टैंड से खुलने के बाद चालकों का बस पर कोई नियंत्रण नहीं रहता है. सड़क पर बस चालक की स्थिति देख छोटे वाहन तो सड़क किनारे खड़े होकर अपनी जान की सलामती की दुआ मांगने लगते हैं. खासकर मधेपुरा की ओर जाने और उधर से आने वाली गाड़ी अनियंत्रित गति में चलती है. हालांकि उसके लिए समय सीमा के बाद बायपास निर्धारित है. यह बायपास भी घनी आबादी वाले मुहल्लों के बीच से ही गुजरा है. इस बायपास में कई खतरनाक मोड़ हैं,
लेकिन बस की रफ्तार में वे मोड़ भी कांप जाते हैं. सामने से आ रहा दूसरा वाहन हो या पैदल व्यक्ति इस होकर गुजरने वाली बस अथवा अन्य वाहनों से बच कर निकलना चाहते हैं. लेकिन फिर भी हादसे होते ही रहते हैं. प्रशासन का इस पर कोई लगाम नहीं है. गुरुवार को पॉलिटेक्निक ढाला के पास छात्र को धक्का मारते बस को देखने के बाद वहां मौजूद लोग उग्र हो गये और बस में तोड़फोड़ करते उसे फूंक डाला.
शंकर चौक पर छात्र की हुई थी मौत : बस की तरह ही ट्रकों की रफ्तार भी कम होने का नाम नहीं ले रही है. इसके कारण लगभग पांच वर्ष पूर्व शंकर चौक पर दिसंबर में ही ट्रक की चपेट में आने से छात्र की मौत हो गयी थी. छात्र की मौत की सूचना आग की तरह शहर में फैल गयी थी. इसके बाद आक्रोशित छात्रों ने शहर में हंगामा मचाया था.
शहर की स्थिति प्रशासन के नियंत्रण से बाहर हो गयी थी. किसी तरह छात्रों को शांत कराया गया था. इस दौरान शहर में भय का माहौल बन गया था. घर से बाहर निकलने में लोग परहेज कर रहे थे. लाखों की सरकारी व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था. घटना के बाद यातायात व्यवस्था को सुढृढ़ करने के लिए सदर थाना में ही यातायात विंग की स्थापना की गयी थी.
चालकों पर हो कार्रवाई : जिला प्रशासन द्वारा दो पहिया व चार पहिया वाहन के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान की तरह ही बस व ट्रक के विरुद्ध भी अभियान चलाने की आवश्यकता है. पदाधिकारी वाहन चालक की भी जांच करें कि जो वाहन चला रहा है, उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस है या नहीं. इसके अलावे वाहन चालक ने वाहन चलाते समय नशा का सेवन तो नहीं किया है.
जानकारी के अनुसार अनुभवी व लाइसेंसी चालक द्वारा ज्यादा पैसा मांगे जाने के कारण खलासी जो कुछ साल चालक के साथ रह चुका है. उसे वाहन की चाबी थमा दी जाती है. इसके कारण भी इस तरह की घटना होती है. यदि प्रशासन इसकी जांच करें तो कई दुर्घटना को होने से रोका जा सकता है.
नहीं होती है कार्रवाई : सहरसा से प्रतिदिन छोटी से बड़ी सैकड़ों बस, ऑटो सहित अन्य वाहन दूसरे जिले के लिए खुलती है. इन वाहनों की स्थिति यह रहती है कि निर्धारित सीट से ज्यादा यात्रियों को बैठाया जाता है और छत पर भी सवारियों को बैठा ले जाया जाता है. इतना ही नहीं रही सही कसर छत पर सामान लाद कर भी पूरी कर ली जाती है. इसको देखने की परिवहन विभाग को फुरसत नहीं है, जबकि यह दिन भर का नजारा होता है.
