परेशानी . एक शिक्षिका के सहारे होगी 92 छात्राओं की पढ़ाई
एक ट्यूटर के भरोसे अब 92 छात्राएं
14 दिसंबर तक स्वास्थ्य विभाग को करनी होगी मुकम्मल व्यवस्था
2013 से रिक्त है स्थायी प्राचार्या का पद
सहरसा : जिला स्कूल के सामने स्थित एएनएम स्कूल की शिक्षा व्यवस्था तो पूर्व से ही चौपट थी. रही-सही कसर 14 दिसंबर के बाद पूरी होने वाली है. स्कूल की प्रभारी प्राचार्या जैंसी थॉमस ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है. जानकारी के अनुसार उनको दूसरी जगह नौकरी मिलने के बाद उन्होंने विभाग को एक माह पूर्व अपना त्यागपत्र सौंप दिया. किसी भी पद से इस्तीफा देने के लिए एक माह पूर्व सूचित करना पड़ता है. उन्होंने अपना त्यागपत्र व प्रभार स्थानांतरण की भी बात कही है. इनके त्यागपत्र के बाद स्कूल की लगभग 92 छात्राओं को मात्र एक शिक्षिका के भरोसे रहना पड़ेगा. विभाग को स्कूल की शिक्षा व्यवस्था व अनुशासन बनाये रखने के लिए 14 दिसंबर से पूर्व मुकम्मल व्यवस्था करनी होगी.
2013 से रिक्त है प्राचार्या का पद
इस स्कूल में कई जिलों की छात्रा पढ़ाई करती हैं. विडंबना यह है कि लगभग चार वर्षों से यह स्कूल प्रभारी प्राचार्या के निर्देशन में चल रहा है. जानकारी के अनुसार 31 जनवरी 2013 को प्राचार्या के हटने के बाद कैथरीन किस्कू को दैनिक कार्य का प्रभार दिया गया था. वर्ष 2015 के 23 मार्च को उनका निधन हो गया. इसके बाद ट्यूटर के पद पर पदस्थापित जैंसी थॉमस को दैनिक कार्य के लिए विभाग द्वारा प्रभार दिया गया, जो अब तक प्रभार में हैं. उनके त्यागपत्र व प्रभार हस्तांतरण की बात कहे जाने के बाद यह बात सामने आ रही है कि बची एक ट्यूटर छात्राओं को पढ़ायेगी या फिर कागजी कार्यवाही करेगी.
सात कर्मी के भरोसे हो रहा है संचालन
स्कूल वर्तमान में सात कर्मियों के भरोसे चल रहा है. जानकारी के अनुसार प्राचार्या का पद रिक्त है. इसके अलावे नर्सिंग ट्यूटर के स्वीकृत सात की जगह दो, वरीय लिपिक के स्वीकृत एक के विरुद्ध एक लिपिक, वाहन चालक के स्वीकृत एक पद के विरुद्ध एक, आदेशपाल व स्वीपर के छह पद के विरुद्ध तीन पदस्थापित हैं. वहीं स्कूल में कनीय लिपिक, लाइब्रेरियन, लैबोरेट्री अटेंडेंट, चौकीदार, क्लीनर, फोटोकॉपी ऑपरेटर न ही स्वीकृत है और न ही पदस्थापित है. ऐसे में जिसके भरोसे मरीज का इलाज होता है, वह कितना कारगर साबित हो सकता है, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है.
हमेशा रहा है चर्चा में
एएनएम स्कूल कभी छात्राओं के अनशन तो कभी कुव्यवस्था को लेकर हमेशा चर्चा में रहा है. मालूम हो कि कई बार छात्राओं के द्वारा कुव्यवस्था को लेकर हंगामा व अनशन तक किया जा चुका है. वहीं यहां चोरी की घटना भी घट चुकी है. इतना ही नहीं प्रबंधन पर भी कई बाद उंगुली उठ चुकी है. इसके कारण जिलाधिकारी व स्थानीय विधायक को भी हस्तक्षेप करना पड़ा है.
