दो साल से नहीं है जिले में आयुर्वेदिक दवा का भंडार
जिले के कई एपीएचसी में आयुष चिकित्सक दे रहे हैं अपनी सेवा
सहरसा : युनानी, होमियोपैथ व आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए सात वर्ष पूर्व जिले में तैनात किये गये 31 आयुष चिकित्सक दो साल से बिना दवाई के लोगों का इलाज कर रहे हैं. सदर अस्पताल में एक भी आयुष चिकित्सक पदस्थापित नहीं हैं. जिले में पदस्थापना के बाद इन लोगों को कई पीएचसी व एपीएचसी में पदस्थापित किया गया.
पदस्थापना के कुछ दिन के बाद ही लगभग आधा दर्जन चिकित्सकों ने सेवा छोड़ दी. इसके बाद इनलोगों ने मरीजों का इलाज सुदूर देहात में बने एपीएचसी में शुरू किया. इनलोगों को जिस उद्देश्य से जिले में पदस्थापित किया गया था. वह उद्देश्य कुछ साल के बाद ही टूट गया और ये लोग मरीजों को मजबूरी वश एलोपैथ की दवा लिखनी शुरू कर दी. जानकारी के अनुसार, सरकार के स्तर से बीते वर्ष 2015 में ही दवा उपलब्ध करायी गयी थी.
दो साल से ये सभी चिकित्सक बिना दवा के ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं. मरीजों के आने पर उन्हें अपनी समझ के अनुसार, एलोपैथ की दवा लिख देते है. जबकि सरकार ने यूनानी, होमियोपैथ व आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए इन की नियुक्ति की थी. ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीजों का इलाज कितना बेहतर हो पाता होगा. मरीजों के स्वास्थय के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है. सदर अस्पताल में एक कमरा आयुष चिकित्सक के नाम से है, लेकिन उसमें होमियोपैथ कॉलेज के एक चिकित्सक मरीजों की सेवा करते हैं. जानकारी के अनुसार, उसमें दवा भी होमियोपैथ कॉलेज से ही दिया जाता है. अस्पताल प्रशासन ने सिर्फ एक कमरा दिया हुआ है.
नहीं हो रही दवा की आपूर्ति
सरकार के स्तर से जब दवा की आपूर्ति की जाती है, तो जिले में उसका वितरण होता है. सरकार के स्तर से ही नियमित दवा की आपूर्ति नहीं होने के कारण दवा की कमी रहती है.
आसीत रंजन, डीपीएम, जिला स्वास्थय समिति सहरसा
