गन्ने के रस से गुड़ बनाने का काम हुआ शुरू
अनुमंडल का बना गुड़ भेजा जाता है जिले से बाहर भी
सिमरी बख्तियारपुर : सर्दियों के मौसम में आते हैं गन्ना किसान के चेहरे पर खुशियां भर आती है. क्योंकि गन्ने की रस से गुड़ बनाकर लाखों की कमाई कर लेते हैं. जिससे उनका साल भर के जीवन यापन का खर्च निकल आता है. अनुमंडल के सिमरी बख्तियारपुर, सलखुआ, बनमा इटहरी प्रखंडों में गुड़ बनाने का काम किसानों ने शुरू कर दिया है. सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के मोहनपुर पंचायत हरियो, ढोली, तरियानी, तुर्की में गुड़ बनाया जा रहा है. किसान मोहन सिंह, सोहन साह, गरीब साह ने बताया कि प्रत्येक वर्ष हम लोग गन्ने की खेती करते हैं. आसपास के गन्ने की खरीदारी भी कर उसका गुड़ बनाकर हम लोग बेचते हैं.
जिससे वर्ष का खर्चा काटकर तीन से चार लाख रुपया कमा लेते हैं.
अपनी पसंद के बनवा रहे हैं गुड़: क्षेत्र में गन्ने की फसल पकने के साथ गुड़ बनाने वाले कोल्हू का पहिया पंद्रह-बीस दिनों से घूम रहा है. सड़कों के किनारे गन्ने के खेतों के आस पास चल रहे कोल्हू पर गन्ने से बना ताजा गुड़ राहगीरों को अपनी और आकर्षित कर रहा है. किसान गन्ने का गुड़ निकलवाकर बाजार में बेचने पर मजबूर हैं. गुड़ के शौकीन कोल्हू से अपने मनपसंद का गुड़ बनवाकर खरीद कर रहे हैं. गुड़ के शौकीन खास तौर पर सर्दियों के लिए गुड़ बनवा कर ले जा रहे हैं. जिसमें वे काजू, किशमिश, बादाम, मूंगफली सहित अन्य सामान डलवाते हैं. ताकी गुड़ का स्वाद बढ़ जाए. आजकल क्षेत्र में गुड़ के शौकीन लोगों का आना शुरू हो गया है. किसानों ने बताया कि अनुमंडल के सिमरी बख्तियारपुर बाजार के साथ-साथ बनाए गए गुड़ को सहरसा, मधेपुरा, सुपौल सहित पूर्णिया जिला तक बिक्री के लिए भेजा जाता है. जहां ये ऊंचे दामों पर बिक जाते हैं. वहीं मुनाफा भी ज्यादा होता है
हर ऋतु में है फायदेमंद: गन्ने के रस की विशेषता यह है कि गन्ने का रस गर्मी में शरीर को ठंडक पहुंचाता है. वहीं दूसरी ओर रस से बना हुआ गुड़ शीत ऋतु में गर्मी प्रदान करता है. इसी तरह गुड़ की तासीर भी ठंडी होती है. मकर संक्रांति पर्व पर गुड़ के व्यंजन बनाकर भगवान को भोग लगाना एवं खाने की परंपरा भी सदियों पुरानी रही है जो आज भी जारी है. ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में गुड़ के लडडू बनाने एवं घर आये मेहमानों को खिलाने की परंपरा रही है. पहले अतिथियों का सत्कार गुड़ चना खिलाकर किया जाता था. प्रसव पीड़ा के दौरान गुड़ सोंठ एवं अनेक मेवे मिलाकर गर्भवती महिलाओं को खिलाने की भी परंपरा रही है. जिसका उद्देश्य महिला प्रसूता महिला के शीघ्र स्वस्थ होने से है.
