कहीं शटर डाउन, तो कहीं ''नो कैश'' की तख्ती

सहरसा : नोटबंदी के बाद से एटीएम की खराब हुई दशा साल भर बाद भी ठीक नहीं हो पायी है. लोग अपने खाते में जमा पैसे को निकालने के लिए अब भी एटीएम दर एटीएम भटकने को मजबूर हैं. कहीं शटर डाउन है, तो कहीं नो कैश का बोर्ड टंगा है. कहीं कार्ड डालने के […]

सहरसा : नोटबंदी के बाद से एटीएम की खराब हुई दशा साल भर बाद भी ठीक नहीं हो पायी है. लोग अपने खाते में जमा पैसे को निकालने के लिए अब भी एटीएम दर एटीएम भटकने को मजबूर हैं. कहीं शटर डाउन है, तो कहीं नो कैश का बोर्ड टंगा है. कहीं कार्ड डालने के बाद सारी प्रक्रिया पूरी करने पर अगले एटीएम से सेवा लेने की बात बतायी जाती है.

नहीं डालते सौ के नोट: एटीएम में दो हजार व पांच सौ रुपये के बड़े नोटों के अलावा छोटे नोट नहीं डाले जा रहे हैं. जिससे लोगों को छुट्टे कराने की समस्या बनी रहती है. अधिकतर एटीएम में दो हजार के गुणक में रुपये निकालने की बाध्यता फीड की हुई है. जिससे लोगों को बेवजह आवश्यकता से अधिक रुपये निकालने पड़ रहे हैं. एक बार निकला अधिक पैसा वापस बैंक में जमा भी नहीं होता. क्योंकि महीने में तीन बार ही कैश जमा करने की बाध्यता वहां भी परेशान करती है. शहरी क्षेत्र के खाते में तीन हजार व ग्रामीण क्षेत्र में दो हजार रुपये हमेशा बैंक खाते में रखने की बाध्यता में अधिक रुपये निकालना मुसीबत साबित हो रहा है.
पूरी प्रक्रिया के बाद एटीएम कहती है सॉरी
जिले के लीड बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अपने नौ एटीएम हैं. जबकि एनसीआर द्वारा संचालित एटीएम की संख्या पांच दर्जन से भी अधिक है. इसके अलावा सभी बैंकों के एक से चार तक एटीएम हैं. लेकिन किसी भी प्वाइंट की स्थिति ठीक नहीं है. अधिकतर एटीएम के या तो शटर डाउन रहते हैं या मशीन में कैश नहीं होते. जिसमें रहते भी हैं तो इतने कम कि घंटे भर में सारी राशि समाप्त हो जाती है. कतार में लगे लोगों को बैरंग लौट जाना होता है. कैशविहीन एटीएम में या तो ‘नो कैश’ लिखी तख्ती टांग दी जाती है या कार्ड डालने और सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सॉरी बताता मशीन आसपास के दूसरे एटीएम की सेवा लेने की जानकारी देता है. बैंक के नियमों के अनुसार, उपभोक्ता अपने बैंक के एटीएम से महीने में पांच बार और दूसरे बैंक के मशीन का तीन बार ही उपयोग कर सकता है. इसी में बैलेंस इंक्वायरी तक की गिनती शामिल है.

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