सचिन पायलट ने की लालू-नीतीश की सरदार पटेल से तुलना, बयानबाजों के लिए दी ये सलाह

ये दोनों मिल कर देश के नेताओ को एक करने में लगे हैं और इनके छुटभैया नेता अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं. जैसे मांझी को निकाला, इनको भी निकालिए, कचरा साफ कीजिए. महागठबंधन जीतेगा, सामंतवाद हारेगा..!!!

पटना. राजस्थान कांग्रेस के कद्दावर नेता सचिन पायलट ने बिहार की महागठबंधन सरकार को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. सचिन पायलट ने देश भर के विपक्षी दलों को एकजुट करने में लगे नीतीश कुमार की तुलना सरदार पटेल से की है. साथ ही उन्होंने बयानबाजों पर सख्त कार्रवाई करने की भी सलाह दी है. सचिन पायलट ने सोशल मीडिया पर नीतीश और लालू की तस्वीर साझा करते हुए लिखा है कि सरदार पटेल की तरह ये दोनों मिल कर देश के नेताओ को एक करने में लगे हैं और इनके छुटभैया नेता अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं. जैसे मांझी को निकाला, इनको भी निकालिए, कचरा साफ कीजिए. महागठबंधन जीतेगा, सामंतवाद हारेगा..!!!

महागठबंधन में लगी बयानबाजी पर रोक

सचिन पायलट का यह बयान महागठबंधन की ओर से आयोजित विधानमंडल की बैठक से ठीक पहले आया है. बैठक में नीतीश कुमार गठबंधन के कुछ नेताओं की बयानबाजी और कार्यशौली से बेहद नाराज दिखे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महागठबंधन विधायक दल की बैठक में सुनील सिंह पर बड़ा आरोप लगा दिया था. नीतीश कुमार ने कहा था कि सुनील सिंह भाजपा नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संपर्क में है. सुनील सिंह भाजपा में शामिल होकर चुनाव लड़ना चाहते हैं. तभी अमित शाह के साथ फोटो खिचवाया था. इसके बाद सुनील सिंह ने अपने उपर लगे आरोपों का जवाब दिया. इसके बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने तमाम पार्टी नेताओं को बयानबाजी करने से मना कर दिया है और कहा है कि पार्टी में बयान देने के लिए दो लोग ही अधिकृत होंगे.

गलहोत के प्रति नरम हुए सचिन

इस बीच, सचिन पायलट ने जिस तरह से बिहार और राजस्थान की राजनीति पर बयान दिया है, ये राजस्थान में कांग्रेस के लिए सुकून देने वाला बयान है. पिछले 3-4 साल से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ सचिन पायलट मोर्चा खोले थे. अब सचिन पायलट ने जो कहा है, उससे साफ है कि आगामी चुनाव में वे पूरी मजबूती के साथ कांग्रेस को फिर से सत्ता में लाने के लिए अशोक गहलोत के साथ कदम से कदम मिलाने को बिल्कुल तैयार हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने 6 जुलाई को दिल्ली में राजस्थान के तमाम बड़े नेताओं के साथ पार्टी की चुनावी रणनीति को लेकर बैठक की थी. राजस्थान कांग्रेस में गहलोत-पायलट के बीच जारी खींचतान पर पूर्ण विराम लगाने के लिहाज से इस बैठक को अहम बताया गया था.

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