Rupesh Pandey: बिहार की सियासत में हलचल जारी है. बिहार में नवंबर 2026 तक विधान परिषद की 17 सीटों पर चुनाव को लेकर राजनीति माहौल गर्म है. 30 मार्च को ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया था. विधान परिषद की 9 सीटें 28 जून 2026 को खाली होंगी. जबकि 8 सीटें नवंबर 2026 में खाली होंगी. ऐसे में कुल 17 सीटों के लिए सियासी जंग इस साल जारी रहेगी. फिलहाल राज्य में कुल 11 सीटों पर होने वाला यह चुनाव राजनीतिक दलों के लिए अहम माना जा रहा है
वर्तमान दलीय विधायकों की संख्यात्मक स्थित के अनुसार बिहार विधान परिषद चुनाव में एक उम्मीदवार को जिताने के लिए कम से कम 25 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है. चुनाव ने न सिर्फ पटना बल्कि दिल्ली तक राजनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है. बिहार विधान परिषद में सीट को लेकर राजनीति तेज है. बिहार में एनडीए की सरकार है और संख्या बल भी 202 हैं
ऐसी संभावना है कि सम्राट चौधरी एमएलसी चुनाव में भी विपक्षी दलों को झटका देने की तैयारी कर रहे हैं. इसी कड़ी में बिहार चंपारण के रहने वाले समाजसेवी और बिजनेसमैन रूपेश पाण्डेय का नाम भी सामने आ रहा है. विधान परिषद की 17 सीटों पर रूपेश पाण्डेय भी दमखम लगाने की तैयारी कर रहे हैं और एनडीए की सीट पर चुनाव लड़ सकते हैं.
रूपेश पाण्डेय को लेकर दावा है कि इस बार उनकी विधान परिषद में एमएलसी के रूप में एंट्री हो सकती है. बिजनेसमैन और सामाजिक कार्यकर्ता रूपेश पांडेय बिहार के युवाओं के लिए कुछ करने की प्लानिंग कर रहे हैं. इस बार उनकी बिहार विधान परिषद में एमएलसी के जबरदस्त दावेदारी देखी जा रही है.
आगामी एमएलसी चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन एनडीए मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है. विधान परिषद चुनाव के लिए लोजपा (रामविलास) प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी भी एक सीट पर दावा ठोक रही है.
राज्यसभा चुनाव में अपने 19 विधायकों के समर्थन के बदले पार्टी विधान परिषद सीट चाहती है. वहीं, भाजपा कोटे से खाली हुई सीट (मंगल पांडेय के इस्तीफे के बाद) और जदयू कोटे से खाली सीट (नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद) पर उपचुनाव भी होना है.
एक सीट जीतने के लिए 25 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है, जबकि महागठबंधन के पास एआईएमआईएम और बसपा को मिलाकर कुल 41 विधायक हैं. इस गणित के अनुसार महागठबंधन सिर्फ एक सीट ही आसानी से जीत सकता है. दूसरी सीट के लिए उसे 9 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी.
