आरक्षण मुद्दे में चिराग-मांझी के बाद अब लालू की बेटी की एंट्री, रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया पर दी नसीहत

Rohini Acharya On Reservation: बिहार में दलित आरक्षण को लेकर NDA के भीतर घमासान बढ़ता जा रहा है. चिराग पासवान और जीतन राम मांझी आमने-सामने हैं. अब रोहिणी आचार्या ने भी एंट्री लेते हुए आरक्षण की समीक्षा के खिलाफ अपनी बात रखी है.

Rohini Acharya On Reservation: दलित आरक्षण के मुद्दे पर बिहार की सियासत गरमा गई है. केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बीच शुरू हुआ विवाद अब इस्तीफे की मांग तक पहुंच गया है. इस सियासी बहस में अब आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्या की भी एंट्री हो गई है. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए दोनों नेताओं को आरक्षण के मुद्दे पर लंबी नसीहत दी है.

आरक्षण की समीक्षा पर आमने-सामने चिराग और मांझी

विवाद की शुरुआत दलित आरक्षण की समीक्षा और इसमें उप-वर्गीकरण की मांग को लेकर हुई. जीतन राम मांझी के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की बात कही है.

उनका तर्क है कि दलित समाज की कुछ जातियों को आरक्षण का ज्यादा लाभ मिला है. वहीं, कई जातियां आज भी इसका फायदा नहीं उठा पाई हैं. ऐसे में वंचित जातियों को आरक्षण में विशेष प्राथमिकता देने के लिए उप-कोटा तय किया जाना चाहिए.

चिराग पासवान ने आरक्षण की समीक्षा की मांग का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए.

चिराग ने मांझी पिता-पुत्र से मांगा इस्तीफा

आरक्षण के मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है. चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी और संतोष सुमन को इस्तीफा देकर इस मुद्दे पर बहस करने की चुनौती दी है.

मांझी और उनके बेटे की ओर से भी इसका जवाब दिया गया है. संतोष सुमन ने कहा कि अगर चिराग पासवान पहले इस्तीफा देकर बयान जारी करते हैं, तो वे भी आगे इस पर फैसला करेंगे. इस बयान के बाद एनडीए के भीतर आरक्षण का मुद्दा और गरमा गया है.

अब रोहिणी आचार्या की हुई एंट्री

इस पूरे विवाद में अब आरजेडी नेता रोहिणी आचार्या ने भी अपनी बात रखी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट लिखी है.

रोहिणी ने कहा कि समाज में गैर-बराबरी रहने तक आरक्षण जरूरी है. उनके मुताबिक, जब तक सामाजिक और आर्थिक असमानता खत्म नहीं होती, तब तक आरक्षण की समीक्षा करना उचित नहीं है.

उन्होंने आरक्षण को सिर्फ कल्याणकारी योजना मानने से भी इनकार किया. उन्होंने इसे सामाजिक भेदभाव और असमानता को दूर करने का संवैधानिक माध्यम बताया.

'आरक्षण सिर्फ गरीबी दूर करने का माध्यम नहीं'

रोहिणी आचार्या ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य सिर्फ गरीबी दूर करना नहीं है. इसका बड़ा मकसद वंचित समुदायों की शिक्षा, प्रशासन और शासन में भागीदारी सुनिश्चित करना है.

उन्होंने कहा कि जब तक सभी वर्गों को उनका उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, तब तक आरक्षण के स्वरूप में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए.

उनके मुताबिक, कागज पर प्रगति के बावजूद जातिगत भेदभाव और सामाजिक-आर्थिक असमानता आज भी मौजूद है. ऐसे में आरक्षण वंचित वर्गों के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है.

अंबेडकर और संविधान का भी दिया हवाला

रोहिणी ने अपनी पोस्ट में संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि संविधान अवसर की समानता और सामाजिक न्याय की बात करता है.

उन्होंने आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान सभा की सोच से जोड़ते हुए कहा कि वंचितों का सशक्तिकरण राष्ट्र निर्माण के लिए जरूरी है.

उन्होंने मांझी पिता-पुत्र को संदेश देते हुए कहा कि आरक्षण की समीक्षा से वंचित वर्गों के अधिकार प्रभावित होने की आशंका रहती है. इसलिए मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखना जरूरी है.

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तेजस्वी यादव भी चिराग-मांझी पर बरसे

इससे पहले आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी आरक्षण के मुद्दे पर चिराग पासवान और जीतन राम मांझी को घेरा था.

तेजस्वी ने कहा कि अभी तक कोई ऐसा पैदा नहीं हुआ है, जो आरक्षण खत्म कर सके. उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण के मुद्दे पर बोलने वाले नेताओं को नागपुर से संदेश आता है कि किस पक्ष में बोलना है.

तेजस्वी ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद कभी आरक्षण का फायदा नहीं उठाया. उन्होंने चिराग पासवान और जीतन राम मांझी पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों नेता आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ते रहे हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि चिराग पासवान, जीतन राम मांझी, जेडीयू और आरएलएम आरक्षण खत्म करने वालों के साथ खड़े हैं.

संतोष सुमन ने क्यों उठाई उप-कोटा की मांग?

संतोष सुमन का कहना है कि दलित समाज की कुछ जातियों को आरक्षण का लाभ लगातार मिला है. इससे उनका सामाजिक और आर्थिक उत्थान हुआ.

वहीं, कई दलित जातियां अब भी आरक्षण के लाभ से वंचित हैं. ऐसे में उनका मानना है कि ऐसी जातियों को आगे लाने के लिए आरक्षण व्यवस्था में विशेष प्रावधान किया जाना चाहिए.

इसी मांग को लेकर उन्होंने दलित आरक्षण में उप-कोटा तय करने की बात कही है. अब इस मुद्दे ने बिहार की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है.

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By अभिनंदन पांडेय

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.
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