Bihar News: 13 अगस्त 1942 क्रांतिकारियों ने फूंक डाला था डेहरी स्टेशन, लूट लिया था मालगोदाम

Bihar News: 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में शाहाबाद ने वीरता की अमिट गाथा लिखी. तिलौथू, अकबरपुर और डेहरी में छात्रों, किसानों व मजदूरों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ डटकर संघर्ष किया थी. रेलवे स्टेशन जलाया, मालगोदाम लूटा और निहत्थे होकर भी सैनिकों का सामना किया, जिससे स्वतंत्रता की लौ और तेज हो गई थी.

Bihar News: 83 वर्ष का समय गुजर चुका है. बावजूद इसके लोगों की जेहन में स्वतंत्रता संग्राम के वीरों की कहानियां रची बसी हैं. पीढ़ी दर पीढ़ी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुई घटनाओं को याद किया जा रहा है. तभी तो नयी पीढ़ी यह जान अचरज में है कि हमारे पूर्वज कितने वीर थे कि निहत्थे ही अंग्रेजी सेना की बंदूक के आगे खड़े हो जाते थे.

कब क्या हुआ

9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन का श्रीगणेश किया और भारतीयों को करो या मरो का नारा दिया, तो शाहाबाद में क्रांति की लहर दौड़ पड़ी. 10 अगस्त 1942 को डेहरी और डेहरी से 16 किलोमीटर दक्षिण तिलौथू (जो उस समय जमींदारी स्टेट हुआ करता था) हाइस्कूल के छात्रों ने स्कूल का बहिष्कार कर दिया था. उस दिन डेहरी शांत रहा, पर तिलौथू के छात्रों ने डाकखाना को जला क्रांति का शुभारंभ कर दिया.

दूसरे दिन 11 अगस्त को अकबरपुर में थाना पर कब्जा कर लिया. 12 अगस्त को अकबरपुर में क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी हुई. इसकी सूचना डेहरी पहुंची, तो क्रांति वीरों की भुजाएं फड़क उठीं. फिर क्या था? 12 अगस्त की रात ऐनिकट में क्रांतिकारियों की मिटिंग हुई. मंत्रणा हुई, हमें भी कुछ करना चाहिए. क्रांति के मशाल की लौ को तेज करना चाहिए. तय हुआ कि डेहरी रेलवे स्टेशन और मालगोदाम पर धावा बोला जाए.

13 अगस्त 1942 को उस समय की औद्योगिक नगरी डालमियानगर में किसानों, मजदूरों व छात्रों का विशाल जन प्रदर्शन हुआ था. जमकर भाषण हुआ. इसके बाद क्रांतिवीरों का हुजूम डेहरी रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ा. क्रांतिवीरों ने पहला हमला रेलवे स्टेशन किया और उसे आग के हवाले कर दिया. स्टेशन का कमरा धू-धूकर जल उठा. इसी बीच कुछ क्रांतिकारी डेहरी मालगोदाम की ओर बढ़े. वहां रखे सामानों को लूट लिया. क्रांतिकारियों को आते देख कर्मचारी भाग खड़े हुए.

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अंग्रेज सिपाही का फोड़ डाला था सिर

इधर, आलम यह था कि तिलौथू और अकबरपुर गयी अंग्रेजी सेना को समझ में नहीं आ रहा था कि वह कहां-कहां पहुंचे. पर, डाकखाना और थाना से अधिक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन की घटना ने अंग्रेजों को विचलित कर दिया. 14 अगस्त को अकबरपुर से सीधे अंग्रेजी सेना डेहरी पहुंची. स्वतंत्रता के दीवाने इतने निडर थे कि स्टेशन पर ही जमे हुए थे. निहत्थे क्रांतिवीर और सेना आमने सामने आ डटी.

अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा बुलंद हो रहा था. इसी बीच अंग्रेजों को देख क्रोधित हुए तत्कालीन कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रामवहन सिंह ने एक अंग्रेज सिपाही के सिर को फोड़ डाला. फिर, क्या था? अंग्रेजों ने जमकर क्रांतिकारियों पर लाठियां चटकायी. कई लोग जख्मी हुए थे. बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुईं.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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