सासाराम कार्यालय : मात्र दो वर्ष तीन दिन रहने के बाद सासाराम नगर पर्षद की मुख्य पार्षद कंचन देवी ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. अब वे सिर्फ वार्ड 11 की पार्षद के पद का निर्वहन करेंगी. श्रीमति कंचन नगर विकास विभाग के मंत्री व प्रधान सचिव को प्रेषित इस्तीफा अपने कार्यालय कक्ष में नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी कुमारी हिमानी को सौंपी.
सासाराम नगर पर्षद की मुख्य पार्षद कंचन देवी ने दिया इस्तीफा, अब सिर्फ वार्ड 11 की पार्षद के पद का करेंगी निर्वहन
सासाराम कार्यालय : मात्र दो वर्ष तीन दिन रहने के बाद सासाराम नगर पर्षद की मुख्य पार्षद कंचन देवी ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. अब वे सिर्फ वार्ड 11 की पार्षद के पद का निर्वहन करेंगी. श्रीमति कंचन नगर विकास विभाग के मंत्री व प्रधान सचिव को प्रेषित इस्तीफा अपने कार्यालय […]

इस्तीफा सौंपने के समय उप मुख्य पार्षद विजय कुमार महतो भी मौजूद थे. अपने इस्तीफा के पीछे मुख्य पार्षद ने पारिवारिक कारण बताया है. इस्तीफा सौंपने के बाद कंचन देवी ने कहा कि दो वर्ष का कार्यकाल अच्छा रहा. कुछ पारिवारिक कारण से मैं अपने पद का पूरी तरह निर्वहन नहीं कर पा रही थी.
इस लिए इस्तीफा दे दी. उन्होंने यह कहा कि अगर आगे सब कुछ ठीक रहा, तो दोबारा इस पद के निर्वहन के लिए विचार किया जायेगा. इधर, इओ ने कहा कि मुख्य पार्षद का इस्तीफा मिला है. इसे निर्वाचन विभाग को भेजा जायेगा. निर्वाचन विभाग के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई होगी. उन्होंने बताया कि मुख्य पार्षद के इस्तीफा के बाद उप मुख्य पार्षद में शक्तियां निहित होंगी.
अपनी अकर्मण्यता छिपाने के लिए दिया इस्तीफा : पूनम
विपक्ष की नेता पूनम सिंह ने मुख्य पार्षद कंचन देवी के इस्तीफा देने पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि अपनी अकर्मण्यता छिपाने के लिए उन्होंने इस्तीफा दिया है. अधिकतर पार्षद उनकी कार्यशैली से क्षुब्ध हैं. दो वर्ष में उन्होंने विकास के नाम पर कोई ऐसा काम नहीं किया, जिसे वह जनता के समक्ष दिखा सकें. तैयार सार्वजनिक शौचालयों को भी जनता को समर्पित नहीं कर सकीं.
ड्रेनेज निर्माण के काम को गति नहीं दिला सकीं. कई जगहों पर हो रहे जलजमाव से जनता को निजात नहीं दिला सकीं. शहर में लाइट की व्यवस्था नहीं करा सकीं, तो फिर किस लिए पद पर बनी रहती. अपनी कुर्सी जाते देख कंचन देवी ने पहले ही इस्तीफा दे दिया. ताकि, अविश्वास का सामना नहीं करना पड़े. क्योंकि, वह पार्षदों का विश्वास खो चुकी थीं.