राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस के 3 विधायक गायब, आबिदुर रहमान बोले- फोन बंद है, NDA दे रहा ऑफर

Rajya Sabha Election 2026: बिहार के राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. राज्यसभा चुनाव के वोटिंग के दौरान कांग्रेस के तीन विधायक शामिल नहीं हुए. जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया.

Rajya Sabha Election 2026: बिहार में राज्यसभा चुनाव के वोटिंग के दौरान कांग्रेस के तीन विधायक शामिल नहीं हुए, जिससे सियासी माहौल गर्म हो गया है.

इस बीच आबिदुर रहमान ने दावा किया कि कांग्रेस विधायकों का फोन बंद है क्योंकि उन्हें एनडीए की ओर से लगातार ऑफर दिए जा रहे हैं और उन्हें परेशान किया जा रहा है. राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर चल रही सियासी रस्साकशी के बीच यह मामला और भी चर्चा में आ गया है.

वोटिंग में नहीं पहुंचे कांग्रेस के तीन विधायक

राज्यसभा चुनाव के वोटिंग के दौरान कांग्रेस के तीन विधायक इसमें शामिल नहीं हुए. फारबिसगंज, मनिहारी और वाल्मीकिनगर के विधायक के मोबाइल स्विच होने पर चर्चाओं का बाजार गर्म होने लगा है.

फारबिसगंज के विधायक मनोज बिश्वास से संपर्क करने की भी कोशिश की गई तो उनका भी फोन भी स्विच ऑफ बताया जा रहा है. वाल्मीकिनगर सीट से विधायक चुने गए सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा का फोन भी स्विच ऑफ बता रहा है. इतना ही नहीं मनिहारी विधानसभा सीट से विधायक चुने गए मनोहर प्रसाद सिंह का फोन स्विच ऑफ बता रहा है.

तीनों विधायक सुबह तक होटल नहीं पहुंचे थे. उनकी गैरमौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया.

‘एनडीए की ओर से मिल रहे ऑफर’ का दावा

कांग्रेस विधायक आबिदुर रहमान ने आरोप लगाया कि एनडीए की ओर से उन्हें ऑफर दिए जा रहे हैं और इसी कारण उनका फोन बंद है. उन्होंने कहा कि उन्हें लगातार संपर्क करने की कोशिश की जा रही है, जिससे वे परेशान हैं.

उनके इस बयान के बाद राज्यसभा चुनाव के बीच राजनीतिक खींचतान और तेज हो गई है. हालांकि इस पर एनडीए की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है..

पांचवीं सीट पर सियासी गणित दिलचस्प

बिहार में राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला काफी रोचक हो गया है. विधानसभा के मौजूदा समीकरण के अनुसार इस सीट पर जीत के लिए एनडीए को तीन अतिरिक्त वोटों की जरूरत है. ऐसे में हर विधायक का वोट अहम माना जा रहा है.

यही वजह है कि दोनों राजनीतिक खेमे अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हुए हैं और सियासी गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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