पूर्णिया जिले में 01 से 07 अगस्त तक 'विश्व स्तनपान सप्ताह' का आयोजन समेकित बाल विकास सेवाएं (ICDS) निदेशालय और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है. प्रखंड स्तर से लेकर सभी स्वास्थ्य केंद्रों में आम जनमानस और विशेषकर धात्री एवं गर्भवती माताओं को जागरूक करने के लिए सप्ताह भर विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जाएगा.
जन्म के 1 घंटे के भीतर स्तनपान क्यों है जरूरी?
सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया ने मां के दूध के चिकित्सीय और पोषण संबंधी महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया:
- मृत्यु दर में कमी: जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान (शुरुआती गाढ़ा पीला दूध/कोलोस्ट्रम) शुरू कराने से शिशु मृत्यु दर में 20 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है.
- गंभीर बीमारियों से बचाव: शुरुआती छह माह तक केवल और केवल स्तनपान (Exclusive Breastfeeding) कराने से दस्त (डायरिया) के खतरे में 11% और निमोनिया के खतरे में 15% की कमी आती है.
- मानसिक विकास: लंबे समय तक स्तनपान करने वाले बच्चों का बुद्धिलब्धि (IQ Level) अन्य बच्चों की तुलना में औसतन 3 पॉइंट अधिक पाया गया है.
- माता को लाभ: स्तनपान कराने से माताओं में स्तन कैंसर (Breast Cancer) और ओवेरियन कैंसर से होने वाली मौतों के जोखिम में भारी कमी आती है.
डिब्बा बंद दूध व बोतल मुक्त घोषित किए गए स्वास्थ्य केंद्र
जिला योजना समन्वयक (DPC) डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि अभियान के तहत जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों को डिब्बा बंद दूध, बोतल तथा निपल मुक्त परिसर घोषित किया गया है:
- हेल्दी बेबी शो व कार्यशाला: सभी प्रखंडों में कार्यशालाओं के साथ-साथ 'हेल्दी बेबी शो' प्रतियोगिता का आयोजन होगा, जिसमें स्वस्थ बच्चों और जागरूक माताओं को सम्मानित किया जाएगा.
- नोडल पर्सन की तैनाती: प्रसव केंद्र के पोस्ट नेटल वार्ड (PNC Ward) की इंचार्ज सिस्टर को इस पूरे आयोजन के लिए संस्थान का नोडल पर्सन बनाया गया है.
- स्वास्थ्य कर्मियों का उन्मुखीकरण: एएनएम (ANM), स्टाफ नर्स और ममता कार्यकर्ताओं को डिब्बा बंद दूध व बोतल के उपयोग से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक किया जाएगा.
आंगनवाड़ी सेविका और आशा कर्मी घर-घर चलाएंगी अभियान
के.नगर प्रखंड के बीएचएम विभव कुमार ने बताया कि 'मां' (MAA) कार्यक्रम के अंतर्गत आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी सेविकाएं वीएचएसएनडी (VHSND) सत्रों के माध्यम से 2 वर्ष तक के बच्चों की माताओं से सीधा संवाद करेंगी:
- पिता की सहभागिता: सिविल सर्जन के अनुसार, स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए माताओं के साथ-साथ पिताओं और अभिभावकों का सशक्तिकरण व जागरूकता भी बेहद जरूरी है.
- पोषण सलाह: प्रसव पूर्व जांच (ANC) और शिशु जन्म के समय ही माताओं को इन्फेंट एंड यंग चाइल्ड फीडिंग (IYCF) अभ्यासों की सही जानकारी दी जाएगी.
