पूर्णिया. बीती रात हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि इस बारिश से कोई नुकसान अभी नहीं हुआ है पर किसान इस आशंका से सहमे हुए हैं कि अगर ज्यादा बारिश हो गयी तो फसलों को नुकसान पहुंच सकता है. जानकारों की मानें तो इस बारिश का विभिन्न फसलों पर मिलाजुला असर पड़ने की संभावना है. हालांकि अमूमन हर वर्ष इस मौसम में हल्की बारिश की संभावना बनी ही रहती है लेकिन फिलाहल हुई बारिश को लेकर किसानों की फसलों पर इसका कोई बहुत ज्यादा असर नहीं दिखाई पड़ रहा है. अगर बारिश की संभावना लगातार बनी रही और बारिश हुई तो खडी फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना बन सकती है. लेकिन इस बारिश से अमूमन फायदा ही हुआ है. कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो हल्की बारिश से आम के पेड़ों पर लगे मंजर की एक तरह से धुलाई हो गयी इसका लाभ हुआ है. इन दिनों मौसम में बदलाव होने से यानि दिन में गर्मी और रात में तापमान में गिरावट होने से आम की पैदावार पर इसका असर पड़ सकता है. दूसरी ओर बदली और बूंदाबांदी के साथ साथ तापमान के असर से कुछ फसलों पर लाही कीट का आक्रमण हो सकता है क्योंकि ऐसा मौसम लाही कीट के बिल्कुल अनुकूल होता है.
लाही से छुटकारा के उपाय
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि लाही कीट के नियंत्रण के लिए दो तकनीकों को अपनाया जा सकता है. एक येलो स्टीकी ट्रैप द्वारा और दूसरा दवा द्वारा. इसमें किसी पीले टीन के डब्बे पर ग्रीस अथवा कोई चिकनाई युक्त न सूखने वाला चिपचिपा लेप लगाकर खेतों में फसल के थोड़ा ऊपर रखने से लाह के कीट उसमें आकर्षित होकर चिपक जाते हैं इससे उनका कंट्रोल हो जाता है. इसके अलावा दवा भी उपलब्ध है.बोले वैज्ञानिक
हल्की बारिश से थोड़ी नमी की मात्रा तो बढी जरुर है लेकिन फसलों के ऊपर फिलहाल बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. अभी मौसम में बदलाव का असर आम के मंजरों को टिकोले में सेट होने में व्यवधान डाल सकता है. वहीँ दलहनी एवं तिलहनी व गेहूं फसलों में लाही कीट की समस्या बढ़ सकती है इसके लिए प्रति एकड़ 5 से 6 येलो स्टिकी अथवा दवा के रूप में इमिडाक्लोरोपिड 17.8 प्रतिशत एसएल घुलनशील दवा की एक मिलीलीटर दवा को ढाई से तीन लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करने से छुटकारा मिल जायेगा.डाॅ गोविन्द कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
