नालंदा विश्वविद्यालय में सुर्खियों में आया पूर्णिया की जोएल गुहा का नाम

कुलपति ने किया 22 वर्षीय युवा कवयित्री के तीसरे कविता संग्रह का लोकार्पण

कुलपति ने किया 22 वर्षीय युवा कवयित्री के तीसरे कविता संग्रह का लोकार्पण

महज 15 साल की उम्र में 10वीं कक्षा के दौरान लिखा था पहला कविता संग्रह

पूर्णिया. बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय में आयोजित पहली शास्त्रार्थ 2026 में पूर्णिया की 22 वर्षीय युवा कवयित्री जोएल गुहा का नाम सुर्खियों में रहा. इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. रमेश प्रताप सिंह परिहार एवं अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी द्वारा जोएल गुहा के तीसरे कविता संग्रह ””स्कैटर”” का भव्य लोकार्पण किया गया. विमोचन समारोह में एसएलएलएच के डीन प्रो. वेंकट राव, संकाय सदस्य डॉ. मीर, डॉ. स्मिता सिंह, डॉ. श्रीशा उडुपा, प्रख्यात इतिहासकार के.टी.एस. सराओ और एसबीएसपीसीआर के डीन प्रो. गोदाबरिश मिश्र सहित कई वरिष्ठ शिक्षाविद उपस्थित थे.

वर्तमान में नालंदा विश्वविद्यालय से वर्ल्ड लिटरेचर में मास्टर्स कर रहीं जोएल का यह संग्रह केवल अभिव्यक्ति से आगे बढ़कर कच्ची, गहरी ईमानदारी का दस्तावेज है. जोएल के शब्दों में यह ””””आत्मा की घर वापसी”””” जैसा अनुभव देता है, जो प्रेम से बुना गया एक ऐसा श्रम है कि पाठक इसके पन्नों में अपना ही प्रतिबिंब ढूंढ लेते हैं. इस किताब की आत्मा को और गहरा करते हैं फोटोग्राफर शाहरुख खान द्वारा खींचे गए चित्र. कवर से लेकर भीतर तक की सभी तस्वीरें कविताओं के भाव को नया आयाम देती हैं.

संबल बना माता का प्रोत्साहन, पिता का विश्वास

जोएल की इस साहित्य यात्रा में मां अपर्णा गुहा का निरंतर प्रोत्साहन और पिता, आयकर उपायुक्त संदीप गुहा का शांत लेकिन अटूट विश्वास हमेशा संबल बना रहा. जोएल मानती हैं कि पिता के भरोसे ने ही उन्हें स्त्रीत्व की ओर बढ़ते हुए कलम थामे रखने की ताकत दी. पिता श्री गुहा अभी सिलीगुड़ी में आयकर उपायुक्त के पद पर पदस्थापित हैं. जोएल की साहित्यिक यात्रा बचपन से ही शुरू हो गई थी. जोएल ने महज 15 साल की उम्र में 10वीं कक्षा के दौरान अपना पहला कविता संग्रह ‘स्टिचिज़”””” लिखा. यह किताब शांतिनिकेतन से प्रकाशित हुई और कोलकाता के ऑक्सफोर्ड में लॉन्च की गई. लेखन के लिए जोएल को पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी के हाथों ‘सिलभद्र वाद कौशल सम्मान’ भी मिल चुका है. गृह जिला पूर्णिया में आयोजित ‘ज्ञान संगम 2026’ में जोएल को युवा कवयित्री के पैनल में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया और सम्मानित भी किया गया है.

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