केनगर. केनगर प्रखंड क्षेत्र के बिठनोली खेमचंद, गनेशपुर, दुबे चकला मौजा से 280.57 एकड़ भूमि अधिग्रहण करना प्रस्तावित है. इसको लेकर सामाजिक प्रभाव का आकलन एएन सिन्हा समाज अध्ययन संस्थान पटना के द्वारा प्रभावित किसानों के साथ 9 फरवरी से 11 फरवरी तक तीन दिवसीय जनसुनवाई सह सर्वेक्षण कार्यक्रम बुधवार को समाप्त हो गया. इस बैठक में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी रंजीत रंजन, अंचलाधिकारी दिवाकर कुमार के साथ जिला के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे. इस बैठक में किसानों ने भूमि का अधिग्रहण होने से जीवन पर क्या असर पड़ेगा उसकी विस्तृत विचार रखा. वही प्रखंड जदयू युवा अध्यक्ष मो. दाऊद आलम ने कहा कि इस क्षेत्र में छोटे व सीमांत किसान की भूमि है जिसपर उनका व उनके परिजनों की पूर्ण निर्भरता है. वही आदिल कुमार अशरफ ने प्रस्तावित भूमि का इतिहास व पर्यावरण से जुड़ी बारीकियों पर सुझाव देते हुए कहा कि यह भूमि समुद्र तल से नजदीक है .यहां पर 8 फीट बाद के बाद जल का स्रोत उपलब्ध है. काली मिट्टी होने के कारण तीन फसली उपजाऊ भूमि है. सीमांचल में सबसे बेहतर उपजाऊ भूमि मानी जाती है. यहां के किसान पूर्ण रूप से इस भूमि पर ही निर्भर है . साथ ही कोई किसान यहां एक एकड़ से अधिक का भूमि स्वामित्व नही रखता है. अधिकाधिक किसानों के पास 5 से 10 कट्टा तक ही भूमि है. इसका अधिग्रहण होने से यहां की सामाजिक व आर्थिक स्थिति दयनीय हो जायेगी. इस भूमि को छोड़कर प्रखंड क्षेत्र के अन्य स्थानों पर चारागाह की भूमि या बंजर भूमि का अधिग्रहण किया जाय. इस मौके पर मो. आलम, मो. सानी, मो. अकबर, मो. मसूद, मो. अलीहसन, मो.जमाल, मो. आरिफ, जित्तन साह, मो. सब्बीर, मो. अफरोज के साथ सैकड़ो किसान उपस्थित थे.
280 एकड़ भूमि अधिग्रहण पर किया सर्वेक्षण
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