जेल से गैंग ऑपरेट करने वाला सुबोध सिंह पुलिस रिमांड पर, स्पेशल मोबाइल एप और 15 किलो सोना लूट के टारगेट का खुलेगा राज

Subodh Singh: पूर्णिया सेंट्रल जेल में बंद अंतरराज्यीय ज्वेलरी लूट गिरोह के कुख्यात सरगना सुबोध सिंह को तेलंगाना पुलिस कोर्ट के आदेश पर हैदराबाद ले गई है. पुलिस को इनपुट मिला है कि यह गिरोह पुलिस की रडार से बचने के लिए एक खास मोबाइल एप्लीकेशन का इस्तेमाल करता है, जिससे जुड़े कई बड़े राज अब बेपर्दा होंगे.

पूर्णिया से विकास वर्मा की रिपोर्ट

Subodh Singh: बिहार, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना समेत पांच राज्यों में सोने की दुकानों और बैंकों को निशाना बनाने वाले एक हाईटेक अंतरराज्यीय आभूषण लूट गिरोह के खिलाफ पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है. पूर्णिया सेंट्रल जेल में बंद गिरोह के शातिर सरगना सुबोध सिंह को तेलंगाना पुलिस रिमांड पर लेकर हैदराबाद रवाना हो गई है. तेलंगाना पुलिस को पुख्ता इनपुट मिला है कि इस गिरोह के सदस्य वारदातों की प्लानिंग करने से लेकर उन्हें अंजाम देने तक, पुलिस की साइबर सेल और सर्विलांस से बचने के लिए एक बेहद ‘स्पेशल मोबाइल एप्लीकेशन’ के जरिए आपस में संवाद करते हैं. पूर्णिया सेंट्रल जेल के उपाधीक्षक सुधीर शर्मा ने इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि कोर्ट के निर्देशानुसार उक्त कैदी को तेलंगाना पुलिस की विशेष टीम अपने साथ ले गई है.

जेल से ही गैंग ऑपरेट करने की आशंका, 2008 तक था पुलिस का मुखबिर

पुलिस के अनुसार, सुबोध सिंह कोई साधारण अपराधी नहीं है, बल्कि वह पुलिसिया तंत्र की कमियों और उनकी कार्यशैली का गहरा जानकार है:

  • बिहार के नालंदा का निवासी: सुबोध सिंह मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के चांदी थाना क्षेत्र अंतर्गत चिश्तीपुर का रहने वाला है.
  • पुलिस की रणनीति का मास्टरमाइंड: सुबोध साल 2000 से 2008 के बीच पुलिस का मुखबिर (Informer) रह चुका है. इस दौरान उसने पुलिस की खुफिया रणनीतियों और काम करने के तरीके को बहुत करीब से देखा और सीखा. जेल जाने के बाद उसने इसी अनुभव का इस्तेमाल पुलिस से बचने और देशव्यापी लूट नेटवर्क खड़ा करने में किया.
  • जेल से नेटवर्क संचालन: तेलंगाना पुलिस को मजबूत आशंका है कि वह पूर्णिया सेंट्रल जेल की सलाखों के पीछे बैठकर ही देश के अलग-अलग राज्यों में फैले अपने शूटर्स और लुटेरों के गैंग को मोबाइल व एप के जरिए ऑपरेट कर रहा था.

हैदराबाद में 82.02 लाख की लूट के बाद खुला सरगना का राज

ताजा मामला: यह पूरा मामला बीती 3 मई को हैदराबाद के करीमनगर स्थित ‘पीएमजे ज्वेलर्स’ (PMJ Jewellers) में दिनदहाड़े हुई 82.02 लाख रुपये की ज्वेलरी और हीरों की सनसनीखेज लूट से जुड़ा है. इस मामले में कार्रवाई करते हुए हैदराबाद पुलिस ने 15 मई को गिरोह के तीन शातिर आरोपियों को दबोचा था, जिन्होंने कड़ी पूछताछ के बाद इस पूरी साजिश के पीछे पूर्णिया जेल में बंद सुबोध सिंह के नाम का खुलासा किया.

सुबोध का खौफनाक प्लान: ’15 मिनट में 15 किलो सोना लूटो और 5-5 लाख इनाम पाओ’

गिरफ्तार अपराधियों ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष सुबोध के काम करने के खौफनाक और पेशेवर तरीके का खुलासा किया है:

  • टाइम और टारगेट फिक्स: सुबोध ने अपने गुर्गों के माध्यम से वारदात में शामिल पांचों अपराधियों तक संदेश पहुंचाया था कि उन्हें दुकान के भीतर घुसकर मात्र 15 मिनट के अंदर 15 किलोग्राम सोना लूटकर सुरक्षित बाहर निकलने का टारगेट (लक्ष्य) पूरा करना है.
  • 5-5 लाख का बोनस इनाम: सुबोध ने वादा किया था कि यदि वे पूरा 15 किलो सोना लूटने में कामयाब रहे, तो वह इनाम के रूप में सभी पांचों अपराधियों को 5-5 लाख रुपये का अतिरिक्त कैश बोनस देगा. हालांकि, आभूषण दुकान के कर्मचारियों द्वारा किए गए भारी विरोध के कारण अपराधी केवल 1.61 किलोग्राम सोना और हीरा ही लूट सके थे.

लूट का सोना पिघलाकर नेपाल के रास्ते खपाने का बड़ा नेटवर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस अंतरराज्यीय गिरोह का मोडस ऑपेरंडी (काम करने का तरीका) बेहद शातिर और अंतरराष्ट्रीय स्तर का है. यह गिरोह बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और महाराष्ट्र में ताबड़तोड़ वारदातों को अंजाम देता है. लूट के तुरंत बाद सोने को पश्चिम बंगाल या बिहार के स्थानीय सुरक्षित ठिकानों पर गलाकर (पिघलाकर) बिस्कुट का रूप दे दिया जाता है. इसके बाद इस सोने को खुली सीमा का फायदा उठाकर नेपाल में बैठे उनके अन्य साथियों को भेज दिया जाता है, जहां से इसे दोबारा अंतरराष्ट्रीय बाजार में खपाया जाता है. फिलहाल, तेलंगाना पुलिस सुबोध को हैदराबाद में गुप्त स्थान पर रखकर उस स्पेशल कम्यूनिकेशन एप और उसके मददगारों के बारे में कड़ाई से पूछताछ कर रही है, जिससे देश के कई अन्य बड़े मामलों के भी खुलासे होने की उम्मीद है.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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