बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा करते जिलाधिकारी एवं अन्य  | Prabhat Khabar Network

रूपौली में 30 गांव जलजमाव की चपेट में, सात सामुदायिक रसोई और 19 नावें तैनात

रूपौली अंचल के लगभग 30 गांव गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि से जलजमाव की चपेट में हैं. जिला पदाधिकारी ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया है. प्रशासन द्वारा सामुदायिक रसोई, पशु चारा और वाटर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है.

पूर्णिया. गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण रूपौली अंचल के करीब 30 गांव जलजमाव से प्रभावित हैं. कई प्रभावित परिवारों के घरों में पानी पहुंच गया है. स्थिति को देखते हुए जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने प्रभावित क्षेत्रों का सघन दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया. डीएम ने अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और भोजन, स्वास्थ्य, पशु चारा समेत जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.

बैक वाटर से कारी कोसी का बढ़ा जलस्तर, गांवों में पहुंचा पानी

निरीक्षण के दौरान डीएम अंशुल कुमार ने बताया कि गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण बैक वाटर का असर कारी कोसी नदी पर पड़ा है. कारी कोसी का जलस्तर बढ़ने से रूपौली प्रखंड के कई पंचायतों में बाढ़ और जलजमाव की स्थिति बनी है. प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के घरों तक पानी पहुंचने के साथ मवेशियों के चारे की समस्या भी सामने आ रही है.

सात जगहों पर सामुदायिक रसोई, बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था

जिला प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों के लिए सात स्थानों पर सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही है. यहां बाढ़ प्रभावित लोगों को नियमित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. बच्चों के लिए दूध की भी व्यवस्था की गयी है. डीएम ने सामुदायिक रसोई में भोजन की गुणवत्ता की जांच करते हुए अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.

नाव से जलजमाव वाले इलाकों में पहुंचे डीएम

निरीक्षण की शुरुआत कोइली सिमरा से हुई. यहां सिमरा विद्यालय में संचालित सामुदायिक रसोई की व्यवस्था और भोजन की गुणवत्ता का डीएम ने जायजा लिया. इसके बाद नाव के माध्यम से अनुसूचित जाति टोला, पुरानी ननगोला, साधोपुर, मंझोडीह, टोकरा, सोहरा दियारा और वनकट्टाका समेत जलजमाव वाले क्षेत्रों का भ्रमण किया गया.

मध्य विद्यालय अंजरी में संचालित सामुदायिक रसोई का भी डीएम ने स्थलीय निरीक्षण किया. उन्होंने अधिकारियों को भोजन की गुणवत्ता और प्रभावित लोगों की जरूरतों का विशेष ध्यान रखने का निर्देश दिया. इसके बाद सड़क मार्ग से डोभा पंचायत और मोहनपुर का निरीक्षण कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं.

बाढ़ पीड़ितों के लिए वाटर एंबुलेंस की व्यवस्था

डीएम ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के इलाज के लिए वाटर एंबुलेंस की व्यवस्था की गयी है. इसके माध्यम से जलजमाव वाले क्षेत्रों में पहुंचकर जरूरतमंद लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी. प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 12 स्वास्थ्य शिविर भी संचालित किए जा रहे हैं.

फोटो- राहत सामग्री तैयार करते | Prabhat Khabar Network

पशुओं के लिए चारा और चिकित्सा की भी व्यवस्था

जलजमाव के कारण मवेशियों के चारे की समस्या को देखते हुए प्रशासन ने पशु चारा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है. दो पशु चिकित्सा शिविरों के माध्यम से अब तक 1,064 पशुओं का उपचार किया जा चुका है. प्रभावित परिवारों के बीच 900 से अधिक पॉलीथीन शीट्स का वितरण भी किया गया है.

19 नावें लगातार कर रहीं आवागमन में मदद

प्रशासन की ओर से राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन के लिए कुल 19 नावें लगातार संचालित की जा रही हैं. वहीं पीएचईडी की ओर से आवश्यकतानुसार चापाकल और 16 अस्थायी शौचालयों की व्यवस्था की गयी है. अब तक 700 हैलोजन टैबलेट्स का भी वितरण किया गया है.

सर्वे के बाद मिलेगा राहत और मुआवजा

डीएम अंशुल कुमार ने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों का सर्वे कराया जाएगा. सर्वे के बाद सरकार के निर्धारित नियमों के अनुसार पात्र लोगों को समय पर राहत और मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा. प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाना है.

24 घंटे क्रियाशील है कंट्रोल रूम, हेल्पलाइन नंबर जारी

जिला प्रशासन ने नागरिकों से सतर्क रहने और जलजमाव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचने की अपील की है. लोगों से प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है. किसी भी आपात स्थिति या सूचना के लिए जिला नियंत्रण कक्ष 24 घंटे क्रियाशील है.

हेल्पलाइन नंबर: 06454-242319, 06454-242317, 06454-242320 ईमेल: deoc-purnea.bih@nic.in

निरीक्षण के दौरान अधिकारी रहे मौजूद

निरीक्षण के दौरान प्रशिक्षु आईएएस कुमुद मिश्रा, एडीएम आपदा प्रबंधन, एडीएमओ प्रणव कुमार, एसडीएम धमदाहा, संबंधित बीडीओ और सीओ के साथ विद्युत, आरडब्ल्यूडी एवं पीएचईडी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.

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लेखक के बारे में

By सत्येन्द्र सिन्हा गोपी

सत्येन्द्र सिन्हा गोपी प्रिंट माध्यम में 25 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. आकाशवाणी एवं दूरदर्शन समाचार से पत्रकारिता की शुरुआत की. नाटक, कला संस्कृति, गीत संगीत, कृषि व मेडिकल क्षेत्र में विशेष अभिरुचि रखते हैं.

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