नहाय खाय के साथ आज से शुरू होगा महापर्व का चार दिवसीय अनुष्ठान

परवान चढ़ने लगा अब आस्था के छठ महापर्व का उत्सव

परवान चढ़ने लगा अब आस्था के छठ महापर्व का उत्सव

पूजन सामग्री की खरीद व घाटों सफाई का अभियान तेज

पूर्णिया. लोक आस्था का महापर्व छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान की तैयारी शुक्रवार से तेज हो गयी है. घर-आंगनों में जहां पारम्परिक लोक गीत गूंजने लगे हैं वहीं पूजन सामग्रियों की खरीददारी और घाटों की सफाई का अभियान तेज हो गया है. इसी के साथ नहाय खाय और कद्दू भात की तैयारी भी शुरू हो गयी है. शनिवार को छठव्रती नदी में स्नान कर कद्दू भात का सेवन करेंगे. चूंकि कद्दू की अहमियत इस पर्व में काफी होती है इसलिए बाजारों में इसके भाव आसमान पर थे. सामान्य दिनों में दस से बारह रुपये में बिकने वाला कद्दू बाजारों में इस साल 40 से 80 रुपये तक बिका. इधर, शुक्रवार से ही गंगा स्नान के लिए मनिहारी, काढ़ागोला और बरारी जाने का छठव्रतियों का सिलसिला जारी है. छठ व्रत के लिए घाटों की साफ-सफाई अभियान तेज हो गया है. नदियों, तालाबों और पोखरों के किनारे घाट की छेका-छेकी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ने लगी है. कई जगह दिवाली के बाद ही घाट छेकने लगते हैं.

नदी स्नान के लिए दिन भर लगी रही होड़

छठ महापर्व को लेकर नहाय खाय शनिवार को है पर शुक्रवार को भी नदी स्नान के लिए होड़ मची रही. कहीं गंगा स्नान के लिए मनिहारी और काढ़ागोला जाने वाले दिखे तो कहीं लोग सौरा नदी घाट पर स्नान के लिए जाम में फंसे नजर आए. बस और टैक्सी स्टैण्ड पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई. इसमें कई काढ़ागोला तो कई मनिहारी जाने वाली बसों और सवारी गाडि़यों में सवार हो रहे थे. सभी एक दिन पूर्व ही गंगा स्नान के लिए निकल पड़े हैं. इधर, पूर्णिया सिटी के सौरा नदी में शुक्रवार को भी स्नान करने वालों की खूब भीड़ दिखी. भीड़ के काण पूर्णिया-कसबा सड़क मार्ग पर सिटी के आसपास बार-बार जाम लगता रहा. वैसे, प्रशासनिक स्तर पर इस बार बेहतर पुलिसिंग के कारण लोगों को हमेशा की तरह बहुत परेशानी नहीं हुई. उधर, बाहर से आने वाली बसों में भीड़ बढ़ गई है. बाहर रहने वाले लोग छठ में अपने घर आ रहे हैं ताकि परिवार वालों के साथ भगवान भाष्कर को अर्घ्य दे सकें. पूर्णिया जंक्शन से गुजरने वाली ट्रेनों का हाल भी अमूमन यही है. यही वजह है कि स्टेशन पर टम्पो वालों का कारोबार चल निकला है. शहर और गांव के बाजारों में पान की दुकान हो या फिर चाय-नास्ते की दुकान, हर जगह छठी मैया के गीत गूंज रहे हैं.

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