इमली चांप का राम-जानकी मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र, श्रद्धालुओं की अटूट है श्रद्धा

पूर्णिया जिले के जानकीनगर में स्थित राम-जानकी मंदिर (इमली चांप) श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है. यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं. हर साल बसंत पंचमी पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है.

जानकीनगर (पूर्णिया) से नितेश राय की रिपोर्ट

पूर्णिया जिले के जानकीनगर क्षेत्र स्थित अभयराम चकला पंचायत का राम-जानकी मंदिर (इमली चांप) श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही कारण है कि वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं.

बताया जाता है कि लादूगढ़ ठाकुरबाड़ी के महंत यमुना दास और मधुवन वृंदावन के महंत राघव दास का इस स्थान से विशेष जुड़ाव रहा, जिससे इस धार्मिक स्थल की महत्ता और बढ़ी.

बसंत पंचमी पर लगता है भव्य मेला

मंदिर परिसर में दशकों पुराना विशाल इमली का पेड़ है, जिसकी शाखाएं जमीन तक झुकी हुई हैं. हर वर्ष बसंत पंचमी के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण शामिल होते हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्राचीन समय में यहां 52 फीट ऊंचा राम-जानकी मंदिर था, जो समय के साथ धरती में समा गया.

शिव धनुष के टुकड़े से जुड़ी है मान्यता

स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह के समय टूटे शिव धनुष का एक टुकड़ा इमली चांप में आकर गिरा था. लोगों का विश्वास है कि वह दिव्य अवशेष लंबे समय तक चमकता रहता था. हालांकि यह लोकमान्यता है, जिसका कोई ऐतिहासिक या वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है.

सीता कुंड में स्नान को माना जाता है फलदायी

स्थानीय मान्यता है कि भगवान श्रीराम और माता सीता वनवास के दौरान इस स्थान पर आए थे. कहा जाता है कि यहां एक ही रात में सात पोखरों का निर्माण हुआ था. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सीता कुंड में स्नान कर संतान सुख की कामना करने से मनोकामना पूरी होती है.

कभी नहीं सूखता इमली चांप का जल

इमली चांप की एक विशेषता यह भी बताई जाती है कि यहां का जल कभी नहीं सूखता. इस जलाशय में मछली और मखाना का उत्पादन भी होता है. मंदिर के उत्तर दिशा में स्थित दलदलिया पोखर के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि वहां जमीन में छोटा गड्ढा करने पर ठंडा और मीठा पानी निकलता है.

पर्यटन के रूप में विकसित करने की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि इमली चांप स्थित राम-जानकी मंदिर और श्री मां मंदिर जानकीनगर धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण धरोहर हैं. यदि इन स्थलों का पर्यटन की दृष्टि से विकास किया जाए तो इससे न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्थानीय पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा.

प्रमुख बातें

  1. इमली चांप का राम-जानकी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है.
  2. बसंत पंचमी पर यहां हर वर्ष भव्य मेले का आयोजन होता है.
  3. मंदिर से जुड़ी कई धार्मिक और लोक मान्यताएं प्रचलित हैं.
  4. सीता कुंड में स्नान को स्थानीय लोग शुभ और फलदायी मानते हैं.
  5. स्थानीय लोगों ने धार्मिक स्थल को पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की मांग की.

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By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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