पूर्णिया विश्वविद्यालय में अब QR कोड स्कैन कर दर्ज कराएं शिकायत: 'समर्थ' ऑनलाइन ग्रीवांस पोर्टल शुरू

पूर्णिया विश्वविद्यालय ने 'समर्थ' नामक ऑनलाइन ग्रीवांस रिड्रेसल पोर्टल लॉन्च किया है. यह पोर्टल विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और आम लोगों की शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए बनाया गया है. छात्र से लेकर आउटसोर्सिंग स्टाफ तक, सभी 15 कार्य दिवसों के भीतर अपनी समस्याओं का समाधान पा सकेंगे.

कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह के मार्गदर्शन में पूर्णिया विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं आम लोगों की शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए 'समर्थ' (Samarth) के माध्यम से ऑनलाइन ग्रीवांस रिड्रेसल पोर्टल की विधिवत शुरुआत कर दी है. इस क्रांतिकारी डिजिटल कदम को लेकर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अखिलेश कुमार द्वारा आधिकारिक अधिसूचना (नोटिस) भी जारी कर दी गई है.

छात्र से लेकर आउटसोर्सिंग स्टाफ तक, सभी ऑनलाइन उठा सकेंगे आवाज

विश्वविद्यालय के मीडिया पदाधिकारी प्रो. संतोष कुमार सिंह ने अधिसूचना के हवाले से बताया कि इस नए पोर्टल का दायरा काफी व्यापक रखा गया है. इसके तहत निम्नलिखित लोग अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे:

  • विश्वविद्यालय मुख्यालय और अंगीभूत (कॉन्स्टिट्यूएंट) कॉलेजों के स्थायी कर्मचारी व अतिथि (गेस्ट) शिक्षक.
  • संबद्ध (एफिलिएटेड) महाविद्यालयों के कर्मी और आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत स्टाफ.
  • विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्राएं एवं परिसर में आने वाले अन्य आगंतुक.

इन सभी के लिए समर्थ ग्रीवांस पोर्टल का सीधा लिंक और क्यूआर (QR) कोड विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव कर दिया गया है, जिसे मोबाइल से स्कैन करके भी शिकायत दर्ज की जा सकती है.

15 कार्य दिवसों की तय हुई समय-सीमा, देनी होगी प्रमाणिक जानकारी

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस डिजिटल व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए सख्त नियम और समय-सीमा तय की है:

  1. सटीक जानकारी अनिवार्य: शिकायतकर्ता को अपनी शिकायत दर्ज करते समय सही, पूर्ण और प्रमाणिक (सबूत के साथ) जानकारी देनी होगी, ताकि मामले की सत्यता जांची जा सके.
  2. डेडलाइन तय: विश्वविद्यालय के सभी अंगीभूत व संबद्ध महाविद्यालयों, पीजी विभागों और संबंधित प्रशासनिक प्रकोष्ठों को कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे पोर्टल पर प्राप्त होने वाली किसी भी शिकायत का अधिकतम 15 कार्य दिवसों (Working Days) के भीतर हर हाल में निस्तारण (समाधान) सुनिश्चित करें.

पारदर्शिता और जवाबदेही के नए युग की शुरुआत

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस ऑनलाइन व्यवस्था के लागू होने से न केवल फाइलों के पेंडिंग रहने की परंपरा खत्म होगी, बल्कि जवाबदेही और समयबद्धता भी तय होगी. अब हर शिकायत की ऑनलाइन ट्रैकिंग की जा सकेगी, जिससे छात्रों और कर्मचारियों को घर बैठे यह पता चल सकेगा कि उनकी समस्या पर क्या कार्रवाई हुई है. इस नई पहल से पूरे विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष का माहौल है.


प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

अभिषेक भास्कर प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >