Bihar: 34 करोड़ की लागत से बिहार के इस जिले में बनेगा टूरिज्म प्लेस, पूरणदेवी मंदिर का नया मॉडल तैयार, 500 साल पुराना है इतिहास

Bihar: पूर्णिया जिला मुख्यालय से करीब आठ किमी. दूर शहर के पूर्णिया सिटी स्थित मां पूरणदेवी मंदिर पूरे प्रमंडल के लोगों की श्रद्धा व आस्था का केन्द्र है. यहां पड़ोसी देश नेपाल और पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और देवी दर्शन कर चढावा चढाते हैं.

Bihar, प्रभात खास, पूर्णिया: आने वाले दिनों में पूर्णिया का पूरणदेवी मंदिर बिहार का बड़ा और खूबसूरत पर्यटन स्थल बनेगा. जिला प्रशासन की पहल और राज्य सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद पर्यटन विभाग ने मंदिर समेत आसपास के भूखंड को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के कवायद भी शुरू कर दी है. योजना के मुताबिक इस मंदिर को अत्याधुनिक मॉडल के रूप में विकसित किया जाना है. मॉडल भी तैयार हो चुका है. इससे न केवल यहां आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम होगा बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. परिसर का विस्तार, इसके सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के निर्माण में 34 करोड़ से अधिक लागत आएगी. अपनी प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मां पूरणदेवी मंदिर के कायाकल्प की घोषणा भी की थी.

कैसा पड़ा नाम

पूर्णिया सिटी के इलाके में पूरणदेवी मंदिर ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर के रूप में अवस्थित है. एक जमाने में पूर्ण अरण्य से आच्छादित पूर्णिया की इस धरती पर अवस्थित पूरणदेवी मंदिर को वन देवी भी कहा जाता था. वैसे, आज भी आस पास पुराने पेड़-पौधे इस बात का अहसास दिलाते हैं.

ऐसा कहा जाता है कि माता पूरणदेवी के नाम से ही इस शहर का नाम पूर्णिया हुआ. इस लिहाज से यह पूर्णिया की पहचान है जिसका इतिहास पांच सौ साल पुराना बताया गया है. मंदिर निर्माण के लिए तत्कालीन नवाब शौकत अली ने जमीन दान में दी थी. किसी जमाने में मंदिर के समीप से सौरा नदी गुजरती थी जिसकी धारा कालांतर में बदल गई.

नये मॉडल से बदल जायेगा पूरणदेवी मंदिर का लुक

पूरणदेवी मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए जो मॉडल बनाए गये हैं उससे इसका पूरा लुक बदल जाएगा. दरअसल, मां पूरणदेवी मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने की मांग कई दशकों से होती रही है. हालांकि बीच के सालों में मंदिर के विकास के रुप में छिटपुट कार्य हुए पर पर्यटन स्थल इसे नहीं बनाया जा सका. इधर, जिला प्रशासन द्वारा इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की गई.

इसके लिए इसका मॉडल इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह के मानचित्र पर पर्यटन स्थल के रुप में नजर आये. नई योजना के अनुसार, यहां सप्तर्षि की स्थापना समेत भक्ति के विभिन्न रूपों के स्थापन के लिए संरचना तैयार होगी.

पैदल पार पथ को संभालने के लिए शक्ति के प्रतीक के रुप भव्य व विशाल दो हाथ होंगे. दो भव्य प्रवेश एवं निकास द्वार भी शोभा बढ़ाएगा. इसके साथ ही पार्क, पाथ वे एवं विश्राम स्थल भी बनेगा. श्रद्धालुओं के रहने के लिए आकर्षक गेस्ट हाउस होगा तो कॉटेज और मंडप विशेष आकर्षण होंगे.

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स्टेट हाइवे से मंदिर के लिए बनेगा कनेक्टिविटी रोड

उपलब्ध जानकारी के अनुसार मंदिर को मॉडल के अनुरुप बनाया जाएगा. बेहतर आवाजाही के लिए यहां फुट ओवर ब्रिज कोरीडोर का निर्माण होगा वहीं सड़क के उत्तरी और दक्षिणी भाग को जोड़ने वाला पैदल पार पथ का भी निर्माण होगा. भक्तों की सहज आवाजाही के लिए एक तरफ फुट ओवर ब्रिज कोरीडोर बनेगा तो दूसरी तरफ सड़क के उत्तरी और दक्षिणी भाग को जोड़ने के लिए पैदल पार पथ भी बनाया जाएगा.

स्टेट हाइवे के साथ भी इसे कनेक्ट करने की भी योजना है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पूरणदेवी मंदिर में पर्यटकीय सुविधाओं के विकास के लिए पटना की टीम द्वारा टोपोग्राफिकल सर्वे किया गया है. कहते हैं, मंदिर परिसर में पर्यटकीय सुविधाओं के विकास के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत होगी जबकि पूर्णिया प्रमंडल के अलावा पड़ोसी जिलों के लोग भी धार्मिक यात्रा पर यहां आयेंगे.

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आंकड़ों पर एक नजर

34.10 करोड़ के करीब परियोजना पर आएगा कुल खर्च
12 एकड़ मंदिर के समीप स्थित भूखंड का किया गया अधिग्रहण
700 मीटर तक बनाया जाना है स्टेट हाइवे का संपर्क पथ
5.50 करोड़ की लागत से बनेगी कनेक्टिविटी सड़क

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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