Purnia News: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की छठी वर्षगांठ के अवसर पर पूर्णिया कॉलेज में ऐसा अकादमिक मंथन हुआ, जिसमें केवल नई शिक्षा नीति की उपलब्धियों पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि बिहार में इसके प्रभावी क्रियान्वयन की वास्तविक चुनौतियों को भी विस्तार से सामने रखा गया. महाविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) की ओर से आयोजित परिचर्चा में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने शिक्षा, कौशल, शोध, डिजिटल अवसंरचना और रोजगारोन्मुख शिक्षा जैसे मुद्दों पर गंभीर विचार-विमर्श किया.
कार्यक्रम का आयोजन प्रधानाचार्य प्रो. सावित्री सिंह के मार्गदर्शन में किया गया. इसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को केवल एक सरकारी दस्तावेज के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक परिवर्तन के माध्यम के रूप में समझना और स्थानीय स्तर पर इसे अधिक प्रभावी बनाने के सुझाव तैयार करना था.
शिक्षा को समावेशी और रोजगारोन्मुख बनाने पर जोर
परिचर्चा के मुख्य वक्ता डॉ. मनीष कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा को समावेशी, बहुविषयक, कौशल-आधारित और रोजगारोन्मुख बनाना है.
उन्होंने विद्यार्थियों में कौशल विकास, नवाचार, शोध और आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया. उनके अनुसार बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसरों को देखते हुए शिक्षा प्रणाली को अधिक व्यावहारिक और लचीला बनाना समय की मांग है.
बिहार की परिस्थितियों के अनुसार कार्ययोजना की जरूरत
कार्यक्रम की संयोजिका और IQAC समन्वयक डॉ. साजिदा अंजुम ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को केवल नीतिगत दस्तावेज मानकर नहीं छोड़ा जा सकता. इसे शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव के माध्यम के रूप में लागू करना आवश्यक है.
उन्होंने बिहार की सामाजिक और शैक्षिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया. उनका कहना था कि राज्य की भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के अनुरूप रणनीति बनाई जाएगी, तभी नीति का वास्तविक लाभ छात्रों तक पहुंच सकेगा.
बिहार में एनईपी लागू करने की प्रमुख चुनौतियां
परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने बिहार में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली कई व्यावहारिक चुनौतियों को रेखांकित किया.
ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में शैक्षणिक और डिजिटल अवसंरचना की कमी, इंटरनेट और तकनीकी सुविधाओं तक असमान पहुंच, शिक्षकों की उपलब्धता और प्रशिक्षण, उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर बढ़ाने, छात्र-छात्राओं के ड्रॉपआउट को कम करने और आर्थिक तथा सामाजिक रूप से वंचित विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई.
इसके अलावा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल और व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत करने की जरूरत पर भी विशेष जोर दिया गया.
Purnia News: डिजिटल कनेक्टिविटी और शिक्षक प्रशिक्षण को बताया अहम
चर्चा में भाग लेने वाले शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सुझाव दिया कि बिहार में एनईपी 2020 को प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार, शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता, शोध और नवाचार को बढ़ावा, स्थानीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री, कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार और उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए.
कार्यक्रम में महाविद्यालय के अनेक शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे. सभी प्रतिभागियों ने शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए अपने सुझाव साझा किए और इसे बिहार के शैक्षिक विकास से जोड़कर देखने की आवश्यकता पर बल दिया.
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