पूर्णिया में 3 हजार से अधिक ऑटो-टोटो की हुई कलर कोडिंग, रूट के अनुसार मिलेगी पहचान

पूर्णिया में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ऑटो और टोटो की कलर कोडिंग का विशेष अभियान चलाया जा रहा है. अब तक 3000 से अधिक वाहनों की कलर कोडिंग पूरी हो चुकी है, जिससे रूट के अनुसार उनकी पहचान आसान होगी. यह पहल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और अवैध वाहनों पर अंकुश लगाने में मदद करेगी.

Purnia Auto-Toto Color Coding: पूर्णिया. शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने और जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए जिला प्रशासन एवं ऑटो-टोटो संघ के संयुक्त प्रयास से रूट के अनुसार वाहनों की कलर कोडिंग की जा रही है. इंदिरा गांधी स्टेडियम परिसर में आयोजित विशेष अभियान के तहत अब तक तीन हजार से अधिक ऑटो और टोटो की कलर कोडिंग पूरी की जा चुकी है.

रूट के अनुसार वाहनों की होगी पहचान

कलर कोडिंग का उद्देश्य शहर के अलग-अलग रूटों पर चलने वाले ऑटो और टोटो की पहचान आसान बनाना है. इससे यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने और निर्धारित रूट पर वाहनों के परिचालन में मदद मिलने की उम्मीद है.

वैध कागजात होने पर ही कलर कोडिंग

जिला ऑटो-टोटो संघ के अध्यक्ष जहांगीर आलम उर्फ लड्डू ने बताया कि कलर कोडिंग से पहले वाहनों के लाइसेंस, इंश्योरेंस और अन्य जरूरी कागजात की जांच की जा रही है. वैध दस्तावेज पाए जाने के बाद ही वाहन की कलर कोडिंग की अनुमति दी जा रही है.

आई कार्ड और रंग-रोगन के लिए 320 रुपये शुल्क

संघ अध्यक्ष ने बताया कि चालकों से आई कार्ड के लिए 200 रुपये और रंग-रोगन के लिए 120 रुपये लिए जा रहे हैं. इस तरह कुल 320 रुपये शुल्क निर्धारित है. उन्होंने कहा कि आई कार्ड और कलर कोडिंग से वाहन चालकों की पहचान सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और यात्रियों की सुरक्षा भी बेहतर होगी.

चालकों को धमकी देने की शिकायत

अभियान के दौरान संघ की ओर से कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा ऑटो और टोटो चालकों को कथित रूप से डराने-धमकाने की शिकायत भी सामने आई. संघ का आरोप है कि कुछ लोग प्रशासनिक प्रक्रिया में बाधा डालने का प्रयास कर रहे हैं. संघ प्रतिनिधियों ने ऐसी गतिविधियों पर आपत्ति जताते हुए चालकों से किसी दबाव में नहीं आने की अपील की.

यातायात व्यवस्था में सुधार की उम्मीद

Purnia Auto-Toto Color Coding: ऑटो-टोटो संघ और शहरवासियों को उम्मीद है कि कलर कोडिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वाहनों की पहचान आसान होगी. इससे अवैध रूप से चल रहे वाहनों पर अंकुश लगाने, निर्धारित रूट का पालन कराने और शहर की यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम बनाने में मदद मिल सकती है.


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लेखक के बारे में

By विकास वर्मा

विकास वर्मा प्रिंट माध्यम में 15 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं.

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