– जहां पढ़ते हैं बच्चे , उसके खूंटे से बंधे रहते हैं मवेशी केनगर. केनगर प्रखंड के परोरा पंचायत अंतर्गत वार्ड नंबर 03 महादलित टोला में संचालित प्राथमिक विद्यालय पिपरा बिसनपुर परोरा का संचालन जर्जर सामुदायिक भवन में हो रहा है. जबकि इस विद्यालय को प्रस्तावित हुए दो दशक से भी अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आज तक इसे अपना भवन नसीब नहीं हो सका. वर्तमान में यह विद्यालय एक जर्जर सामुदायिक भवन में संचालित हो रहा है. भवन की स्थिति इतनी भयावह है कि यह जगह-जगह से टूट चुका है. जिस स्थान पर बच्चे बैठकर पढ़ाई करते हैं, उसी भवन के खंभों में स्थानीय लोग अपने मवेशी बांधते हैं. गंदगी और मवेशियों के बीच चबूतरे पर बैठकर बच्चे अपना भविष्य संवारने की कोशिश कर रहे हैं. विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक कुंदन कुमार ने बताया कि स्कूल में कुल 131 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई के इस स्कूल में न तो पेयजल की व्यवस्था है और न ही शौचालय की. संसाधनों के अभाव के बावजूद यहां सात शिक्षकों की टीम तैनात है. इनमें बीपीएससी से नियुक्त पांच महिला शिक्षक हर्षिता कुमारी, अमिता मुर्मू, श्वेता शिवानी, कृति सुमन और साक्षी कुमारीतथा दो पुरुष विशिष्ट शिक्षक कुंदन कुमार और कुणाल किशोर शामिल हैं. स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने सरकार से जल्द से जल्द विद्यालय भवन निर्माण कराने की मांग की है. इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मुकेश वर्मा ने बताया कि अभी तक विद्यालय के लिए भूमि का आवंटन नहीं हुआ है. जैसे ही जमीन आवंटित होगी, भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. चूंकि मैं दो महीने पहले ही यहा पदस्थापित हुआ हूं, इसलिए विभाग से बात कर विद्यालय भवन की समस्या का समाधान निकालने का प्रयास कर रहा हूं.
जर्जर सामुदायिक भवन में संचालित है दो दशक से भूमिहीन प्रावि पिपरा बिसनपुर
जहां पढ़ते हैं बच्चे , उसके खूंटे से बंधे रहते हैं मवेशी
