बढ़ती कीमत ने बिगाड़ा लजीज व्यंजनों का जायका: एक हफ्ते में ₹25 से ₹40 के पार पहुंचा प्याज

Onion Price Hike: पूर्णिया के खुदरा बाजारों में प्याज की कीमतों में अचानक लगी आग से आम आदमी की थाली का स्वाद बिगड़ गया है. नासिक में भारी बारिश और बंगाल से आवक घटने के कारण महज एक सप्ताह के भीतर प्याज ₹25 से छलांग लगाकर ₹40 प्रति किलो के पार बिक रहा है.

पूर्णिया से अखिलेश चंद्रा की रिपोर्ट

Onion Price Hike: आसमान छूती महंगाई का असर अब केवल रसोई के बजट पर ही नहीं, बल्कि आम आदमी के भोजन की थाली पर भी साफ दिखने लगा है. बाजार में कभी टमाटर आंखें दिखाता है तो कभी हरी मिर्च का तीखापन लोगों को परेशान करता है, लेकिन अब प्याज के बढ़ते दामों ने आम उपभोक्ताओं को रुलाने का काम शुरू कर दिया है. विशेषकर मांसाहारी (नॉनवेज) शौकीनों और होटलों में लजीज व्यंजनों का स्वाद प्याज की इस बेतहाशा कीमत वृद्धि के कारण फीका पड़ गया है. पूर्णिया के खुदरा हाट-बाजारों में पिछले एक हफ्ते के भीतर प्याज की कीमतों में ₹15 प्रति किलो तक का भारी उछाल दर्ज किया गया है, जिससे मध्यमवर्गीय और गरीब परिवार बेहाल हैं.

पसेरी से किलो पर उतरे उपभोक्ता; थोक और खुदरा मूल्य में बड़ा अंतर

  • कीमतों में उछाल: महज एक सप्ताह पूर्व तक जो प्याज खुदरा मार्केट में ₹25 प्रति किलोग्राम की सामान्य दर से बिक रहा था, उसका भाव अब ₹40 प्रति किलो के आंकड़े को पार कर गया है.
  • बदली खरीद की आदत: खुदरा दुकानदारों के अनुसार, जो मध्यमवर्गीय परिवार पहले सीधे एक पसेरी (5 किलो) प्याज खरीद कर घर ले जाते थे, वे अब बजट बिगड़ने के डर से एक या दो किलो पर उतर आए हैं.
  • थोक बनाम खुदरा: एशिया प्रसिद्ध गुलाबबाग मंडी में इस समय प्याज का थोक भाव ₹2500 से ₹3000 प्रति क्विंटल (यानी ₹25 से ₹30 प्रति किलो) के स्तर पर बना हुआ है, लेकिन स्थानीय खुदरा दुकानदार और फुटकर विक्रेता इसे ₹40 से ₹45 प्रति किलो तक बेच रहे हैं. इसके अलावा, वर्तमान शादियों के सीजन के कारण भी मांग में भारी तेजी है.

नासिक में बारिश और ट्रांसपोर्टिंग लागत बढ़ने से कम हुई आवक

गुलाबबाग मंडी के थोक प्याज आढ़तियों और कारोबारियों ने बताया कि पूर्णिया सहित पूरे सीमांचल में प्याज की सबसे ज्यादा आपूर्ति महाराष्ट्र के नासिक और पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों से होती है. इस बार नासिक और उत्पादक क्षेत्रों में अत्यधिक मूसलाधार बारिश होने की वजह से खेतों में लगी फसल प्रभावित हुई है, जिससे वहां की मंडियों से आने वाली खेप में अचानक बड़ी कमी आई है. इसके साथ ही डीजल के दामों के कारण ट्रांसपोर्टिंग (परिवहन) खर्च की लागत में भारी इजाफा हुआ है. यदि आवक की यही स्थिति रही, तो आने वाले दिनों में प्याज की कीमतों में और भी बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है.

Onion Price Hike: क्या कहती हैं गृहणियां: बजट प्रबंधन और सब्जियों के स्वाद पर संकट

  • सलाद और सब्जियों में कटौती: दीपशिखा का कहना है कि बाजार में प्याज की कीमत अचानक बहुत तेज हुई है, जिसके कारण अब रसोई में सब्जियों और सलाद में इसका इस्तेमाल बेहद सीमित कर दिया गया है. अगर दाम इसी तरह बढ़ते रहे, तो इसका सीधा असर मांस-मछली की खरीदारी और रसोई के अन्य सामानों पर पड़ेगा.
  • स्वाद पर सीधा असर: रीमा ने बताया कि लगभग सभी भारतीय घरों में खान-पान का मुख्य आधार प्याज ही है. दाम बढ़ने से अब मजबूरी में बजट के अनुसार ही नाप-तोल कर प्याज खरीद रहे हैं, जिससे सब्जियों की ग्रेवी और उनका पारंपरिक स्वाद पूरी तरह प्रभावित हो गया है. फिलहाल महंगा होने के कारण प्याज का स्टॉक रखना संभव नहीं है.
  • सड़े-गले प्याज की आवक से दुहरी मार: सोनी वर्मा ने बाजार की एक और बड़ी समस्या की ओर इशारा करते हुए कहा कि इन दिनों मंडियों में जो प्याज आ रहा है, उसमें नमी के कारण सड़े-गले प्याज की मात्रा ज्यादा रहती है. इससे एक तरफ तो वजन में बर्बादी (खपत) बढ़ गई है और दूसरी तरफ बढ़ी हुई कीमतें मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट बिगाड़ रही हैं.
  • मात्रा में कटौती ही एकमात्र विकल्प: सुप्रिया रानी कहती हैं कि जो लोग लहसुन-प्याज नहीं खाते, उनके लिए स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन सामान्य घरों में शाकाहारी हो या मांसाहारी, प्याज की जरूरत हर व्यंजन में पड़ती ही है. जब कीमतें हमारे नियंत्रण से बाहर हो जाएं, तो भोजन में इसकी मात्रा में कटौती करना ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प बचता है.

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By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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