बनमनखी में माल पहाड़ी समाज का सांस्कृतिक उत्सव, जल-जंगल-जमीन और पूर्वजों की सामूहिक पूजा

बनमनखी के बिलकोदर टोला में माल पहाड़ी समुदाय का तीन दिवसीय पारंपरिक सामाजिक पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। समुदाय ने सामूहिक रूप से इष्ट देवता, जल-जंगल-जमीन, वन्य जीव और पूर्वजों की पूजा-अर्चना की, जो उनकी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है.

Purnia News: पूर्णिया जिले के बनमनखी प्रखंड अंतर्गत धरहरा चकला भूनाई पंचायत के बिलकोदर टोला में माल पहाड़ी समुदाय का तीन दिवसीय पारंपरिक सामाजिक पर्व रविवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हो गया. इस अवसर पर बड़ी संख्या में समुदाय के लोग एकत्र हुए और अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार इष्ट देवता, जल-जंगल-जमीन, वन्य जीव और पूर्वजों की सामूहिक पूजा-अर्चना की. नगाड़ों की थाप, पारंपरिक नृत्य-गीत और सामूहिक भोज के बीच यह पर्व समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकजुटता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया.

रात भर चले सांस्कृतिक आयोजन और पारंपरिक अनुष्ठानों ने पूरे टोले को उत्सव में बदल दिया. समुदाय के बुजुर्गों का कहना है कि यह पर्व केवल धार्मिक आस्था से नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सामाजिक परंपराओं, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामुदायिक संबंधों को मजबूत करने से भी जुड़ा हुआ है.

जल-जंगल-जमीन और पूर्वजों की सामूहिक पूजा

माल पहाड़ी समुदाय के लोगों ने बताया कि इस तीन दिवसीय पर्व में समाज के सभी परिवार एक साथ भाग लेते हैं. प्रत्येक परिवार पारंपरिक रीति के अनुसार कपड़ा, डगरा और प्रसाद अर्पित करता है.

पूजा-अर्चना में इष्ट देवता के साथ-साथ जल, जंगल, जमीन, वन्य जीव और पूर्वजों का स्मरण किया जाता है. समुदाय का मानना है कि प्रकृति और पूर्वजों के प्रति सम्मान ही सामाजिक संतुलन और समृद्धि का आधार है.

नगाड़ों की थाप पर देर रात तक चला पारंपरिक नृत्य

पर्व के दौरान देर रात तक नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक नृत्य-गीत का आयोजन होता रहा. युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक शैली में शामिल हुए.

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है.

पचैय और सामूहिक भोज की अनूठी परंपरा

समुदाय के सदस्यों ने बताया कि पर्व के दौरान चावल से बने पारंपरिक पेय ‘पचैय’ का सेवन किया जाता है.

इसके बाद सामूहिक भोज आयोजित होता है, जिसमें सभी परिवार एक साथ बैठकर भोजन करते हैं. यह परंपरा सामाजिक समानता और सामुदायिक एकता का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है.

रात तीन बजे विसर्जन के साथ हुआ समापन

पर्व का अंतिम चरण देर रात संपन्न हुआ. समुदाय के लोगों के अनुसार, रात करीब तीन बजे पारंपरिक विधि-विधान के साथ विसर्जन किया गया और इसी के साथ तीन दिवसीय सामाजिक पर्व का समापन हुआ.

पूरे आयोजन में पारंपरिक अनुशासन और सामूहिक सहभागिता स्पष्ट रूप से दिखाई दी.

1700 लोगों की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है यह पर्व

समुदाय के उपेंद्र मुखिया ने बताया कि धरहरा चकला भूनाई पंचायत के बिलकोदर टोला में लगभग 136-137 परिवारों के करीब 1700 लोग कई पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि यह पर्व माल पहाड़ी समाज की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है.

Purnia News: शिक्षा के साथ आ रहा सकारात्मक बदलाव

आरबी भारती ने कहा कि यह तीन दिवसीय सामाजिक पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समुदाय की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है.

उन्होंने बताया कि समाज में शिक्षा के प्रसार के साथ सकारात्मक बदलाव आ रहा है और नई पीढ़ी पारंपरिक मूल्यों को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है.

कार्यक्रम में अमरनाथ मुखिया, उपेंद्र मुखिया सहित माल पहाड़ी समाज के अनेक गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे.

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